निर्भया गैंगरेप मामले की जांच में अहम भूमिका निभाने वाली आईपीएस अधिकारी छाया शर्मा को अमेरिका में सम्मानित किया गया है। उन्हें यह सम्मान साहसिक लीडरशिप से जुड़े कार्यों के लिए दिया गया है। रिकॉर्ड टाइम में आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने वाली छाया शर्मा को एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी ने 2019 के मैक्केन इंस्टीटयूट फॉर इंटरनेश्नल लीडरशिप अवॉर्ड से सम्मानित किया।
साहसिक लीडरशिप से जुड़े कार्यों के लिए दिए जाने वाला यह अवॉर्ड पाकिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई को भी दिया जा चुका है, जिन्हें 2015 का नोबेल शांति पुरस्कार दिया जा चुका है। छाया शर्मा 2012 में उस वक्त दक्षिणी दिल्ली की डीसीपी थीं, जब राष्ट्रीय राजधानी के वसंतकुंज इलाके में मानवता को शर्मशार कर देने वाली यह घटना घटी थी।
वह हॉस्पीटल पहुंचकर पीड़िता के हालत का जायजा देखने वाली पहली शख्स थीं। माना जाता है कि उन्होंने जिस तरह से मामले में संज्ञान लिया, उसकी बदौलत ही पुलिस सप्ताहभर के भीतर गैंगरेप के सभी आरोपियों को पकड़ने में कामयाब रही थी, जो बाद में दोषी साबित हुए। इस दौरान जांच में जुटी पुलिस टीम छह दिनों तक घर नहीं गई थी।
कहा जाता है कि अगर अस्पताल में पीड़िता को देखने वाली पहली अधिकारी महिला नहीं होती तो शायद इस केस में जांच उतनी तेजी से आगे नहीं बढ़ी होती। हालांकि इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने एक बार बीबीसी से बातचीत में कहा था, ‘मुझे नहीं पता कि अगर इस केस को एक पुरुष डीसीपी देखता तो कुछ अलग होता। मैं इस पर कुछ नहीं कह सकती। यह उसकी संवेदनशीलता पर निर्भर करता है, चाहे वो पुरुष हो या महिला।’