नई दिल्ली, 1 जुलाई 2025:
आज से ठीक 10 साल पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को डिजिटल युग में आगे ले जाने के उद्देश्य से ‘डिजिटल इंडिया मिशन’ की शुरुआत की थी। यह अभियान केवल तकनीकी बदलाव नहीं था, बल्कि एक राष्ट्रीय चेतना और परिवर्तन का प्रारंभ था, जिसने गांवों को इंटरनेट से जोड़ा, सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन किया और भारत को दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान नेटवर्क का केंद्र बना दिया।
डिजिटल इंडिया की नींव
1 जुलाई 2015 को विज्ञान भवन में हुए एक भव्य कार्यक्रम में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की गई थी। इसका लक्ष्य था – भारत को “Knowledge Economy” और “Empowered Society” बनाना। इस अभियान के अंतर्गत तीन मुख्य विज़न तय किए गए थे:
- सभी नागरिकों को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना
- सभी सेवाओं को ऑनलाइन करना
- नागरिकों को डिजिटल रूप से सशक्त बनाना
डिजिटल ट्रांजैक्शन में क्रांति
भारत आज डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्वकर्ता बन चुका है। कुछ उल्लेखनीय आँकड़े:
- UPI (Unified Payments Interface) के माध्यम से 2024 में 118 अरब से अधिक ट्रांजैक्शन किए गए, जिनकी कुल वैल्यू ₹182 लाख करोड़ से भी अधिक रही।
- NPCI के अनुसार, भारत में हर महीने 13 अरब से अधिक UPI ट्रांजैक्शन होते हैं।
- भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम स्वदेशी और सबसे तेज़ प्रणाली मानी जाती है, जो Google Pay, PhonePe, Paytm जैसे माध्यमों से देश के कोने-कोने तक पहुंच चुका है।
- QR Code आधारित भुगतान प्रणाली ने छोटे दुकानदारों, ठेले वालों और किसानों को भी डिजिटलीकरण की मुख्यधारा से जोड़ा है।
डिजिटलीकरण के अन्य प्रमुख क्षेत्र
1. ई-गवर्नेंस
- लगभग 450+ सरकारी सेवाएँ आज डिजिटली उपलब्ध हैं — जैसे पासपोर्ट आवेदन, पैन कार्ड, बिजली बिल भुगतान, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आदि।
- DigiLocker के माध्यम से 20 करोड़ से अधिक नागरिकों ने अपने डिजिटल दस्तावेज़ सुरक्षित रखे हैं।
2. स्वास्थ्य और शिक्षा
- Ayushman Bharat Digital Mission के तहत अब तक करोड़ों मरीजों का हेल्थ रिकॉर्ड डिजिटल रूप से दर्ज किया गया है।
- DIKSHA पोर्टल और SWAYAM जैसे प्लेटफॉर्म से लाखों छात्र ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
3. ग्रामीण डिजिटल सशक्तिकरण
- कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) नेटवर्क के ज़रिए देश के 6 लाख से अधिक गांवों तक डिजिटल सेवाएँ पहुँचाई गईं।
- भारतनेट परियोजना के तहत लगभग 3 लाख ग्राम पंचायतों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी से जोड़ा गया।
4. डिजिटल पहचान: आधार
- Aadhaar कार्ड का डिजिटल एकीकरण सबसे बड़ा बदलाव रहा। आज 99% से अधिक वयस्क भारतीयों के पास आधार है और इसे बैंकिंग, सरकारी योजनाओं, सिम कार्ड आदि में मुख्य पहचान के रूप में उपयोग किया जाता है।
विश्व में भारत की पहचान
भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अब अन्य विकासशील देशों के लिए मॉडल बन चुका है। ‘इंडिया स्टैक’ — जिसमें UPI, Aadhaar, DigiLocker, और e-KYC शामिल हैं — को ‘डिजिटल पब्लिक गुड्स’ के रूप में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सराहा गया है।
सरकार अब 5G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन और डिजिटल स्किलिंग जैसे क्षेत्रों में अगला डिजिटल विस्तार करने की दिशा में बढ़ रही है। डिजिटल यूनिवर्सल हेल्थ आईडी, नेशनल स्किल इंडिया मिशन और डिजिटल कृषि मंच जैसी पहलें आने वाले वर्षों में इस क्रांति को और मजबूती देंगी।
डिजिटल इंडिया आज सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि भारत के सामाजिक और आर्थिक ताने-बाने में गहराई से समाहित हो चुका है। पिछले 10 वर्षों में इस पहल ने भारत को डिजिटल आत्मनिर्भरता की राह पर तेज़ी से अग्रसर किया है। डिजिटल इंडिया की यह 10वीं वर्षगाँठ सिर्फ तकनीक की उपलब्धि नहीं, बल्कि एक करोड़ों भारतीयों के सशक्तिकरण की कहानी है।
भारत अब सिर्फ डिजिटल हो रहा है, बल्कि दुनिया को डिजिटल दिशा भी दिखा रहा है। 🇮🇳✨