भारतीय विमान दुर्घटना अन्वेषण ब्यूरो (AAIB) ने पुष्टि की है कि 12 जून को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल एयरपोर्ट से टेक-ऑफ़ के तुरंत बाद गिरकर 274 लोगों की जान लेने वाले एयर इंडिया बोइंग-787 ड्रीमलाइनर की दोनों “ब्लैक बॉक्स” इकाइयों—कॉकपिट वॉयस रेकॉर्डर (CVR) और फ़्लाइट डेटा रेकॉर्डर (FDR)—से डेटा सफलतापूर्वक डाउनलोड कर लिया गया है। यह प्रक्रिया 25 जून की रात दिल्ली स्थित एएआईबी प्रयोगशाला में पूरी हुई ।
एएआईबी के अधिकारियों ने कहा कि डेटा का प्राथमिक विश्लेषण अगले सात से दस दिन में पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद प्रारंभिक तथ्यों वाला अंतरिम प्रतिवेदन सार्वजनिक किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किसी भी बड़ा हादसा होने पर 30 दिन के भीतर एक प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की जाती है; मगर मंत्रालय का दावा है कि स्थानीय स्तर पर डिकोडिंग होने से यह समय सीमा और घट सकती है ।
दोनों रिकॉर्डरों को दुर्घटना‐स्थल से क्रमशः 13 और 16 जून को बरामद किया गया था। एयर इंडिया और डीजीसीए पहले इन्हें अमेरिका भेजने पर विचार कर रहे थे, क्योंकि यह ड्रीमलाइनर का पहला बड़ा हादसा है और रिकॉर्डर व इंजन दोनों अमेरिकी मूल की GE Company के हैं। बाद में निर्णय बदला गया और एनटीएसबी विशेषज्ञों की ऑनलाइन निगरानी में दिल्ली लैब में ही एक्सट्रैक्शन कराया गया ।
रक्षा सूत्रों के अनुसार डिकोड की गई फाइलों में आख़िरी 30 मिनट के 88 पैरामीटर और कॉकपिट की दो‐घंटे की ऑडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित मिली है। जांच दल अब इंजन थ्रस्ट, हाइड्रोलिक प्रेशर, और इमरजेंसी पावर जेनरेटर के लॉग पर खास ध्यान दे रहा है। प्रारंभिक संकेत बताते हैं कि टेक-ऑफ़ के 400–600 फ़ुट के बीच विमान के प्राथमिक पावर बस में फ़्लक्चुएशन हुआ, जिसे पायलटों ने “Mayday” कॉल के कुछ सेकंड पहले दर्ज किया था ।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि इलेक्ट्रिकल बस में व्यवधान और इंजन थ्रस्ट गिरावट एक साथ हुई, तो पायलटों के पास रफ्तार बनाए रखने की गुंजाइश बेहद कम रह जाती है। हालांकि AAIB ने ज़ोर देकर कहा है कि अंतिम निष्कर्ष पूर्वाग्रह‐रहित आंकड़ों के आधार पर ही निकाला जाएगा और सभी संभावित कारकों—तकनीकी विफलता, मानवीय त्रुटि या बाहरी कारण—की समानांतर छानबीन चल रही है ।
इस बीच पीड़ित परिवारों ने जांच‐प्रगति के बारे में पारदर्शिता बढ़ाने की माँग की है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने आश्वासन दिया कि अंतरिम रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों भाषाओं में ऑनलाइन उपलब्ध होगी। पूर्ण और विस्तृत दुर्घटना‐रिपोर्ट 90 दिन के भीतर प्रकाशित करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय नियम 12 माह तक की अवधि की अनुमति देते हैं ।
कुल मिलाकर, ब्लैक बॉक्स डेटा डाउनलोड की सफलता से जांच ने निर्णायक गति पकड़ ली है। आगामी 10 दिन प्रमुख होंगे, क्योंकि इन्हीं प्रारंभिक निष्कर्षों से घटी त्रासदी की असली वजह का सुराग और भविष्य में ऐसी घटनाएँ रोकने के उपाय तय होंगे।