अयोध्या, 25 नवंबर 2025 – आज अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर आधिकारिक रूप से केसरिया धर्मध्वज फहराया गया। यह ध्वजारोहण समारोह एक धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक घटना के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह धर्मध्वज मंदिर के शिखर पर फहराया और मौके पर राष्ट्रीय व धार्मिक नेतृत्व मौजूद रहा।
समारोह का महत्व व पृष्ठभूमि
धर्मध्वज को राम राज्य और धर्म की पहचान के रूप में देखा जाता है। इस बार जो ध्वज फहराया गया – उसे ‘Dharma Dhwaj’ कहा गया – उस पर सूर्य, ‘ॐ’ और विशिष्ट वृक्ष (कचनार/कोविदर वृक्ष से जुड़ा प्रतीक) के चिन्ह बने हुए हैं, जिनके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अर्थ गहरे बताए जा रहे हैं। आयोजकों ने कहा कि सूर्य दिव्यता एवं धर्म की अनंतता, ‘ॐ’ सृष्टि-ध्वनि व ब्रह्मांडीय क्रम और वृक्ष जीवन-विकास तथा आस्था की जड़ता को दर्शाता है।
ध्वज की तकनीकी व शिल्पी विशेषताएँ
मंदिर की ऊँचाई पर स्थापित इस ध्वजदंड और ध्वज का निर्माण बड़े ही विशेषज्ञ तरीके से किया गया है। ध्वज का आकार, कपड़ा और धागे विशेष तरह के मौसम-रोधी सामग्रियों से तैयार किए गए हैं ताकि तेज धूप, बारिश और हवा का प्रभाव सह सके। रिपोर्ट के अनुसार यह ध्वज लगभग 22 फीट लंबा और 11 फीट चौड़ा है और उसे घूर्णन-क्षमता वाले 42-फुट उच्च ध्वजदंड पर लगाया गया है, जिसमें बॉल-बेयरिंग्स लगे हैं ताकि तेज हवा में भी ध्वज स्थिर रहे। इसके निर्माण में माहिर पारंपरिक कारीगर और एक प्राचीन फ़र्म का योगदान रहा, जिसका अनुभव 80 वर्षों से अधिक का बताया गया है।
ध्वजारोहण समारोह के लिए लगभग 7,000 अतिथियों को आमंत्रित किया गया था – जिनमें साधु-संप्रदायों, समाज के विभिन्न तबकों, दानदाताओं और स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ-साथ सरकारी अधिकारी भी शामिल थे। कार्यक्रम प्रबंधन के लिए आमंत्रितों की बैठने की व्यवस्था रंग-कोडेड जोन में कराई गई थी ताकि आने-जाने और परिवहन को सुव्यवस्थित रखा जा सके। राज्य सरकार और मंदिर ट्रस्ट ने संयुक्त रूप से अतिथि-आयोजन, यातायात और सुरक्षा की विस्तृत व्यवस्था सुनिश्चित की।

ध्वजारोहण समारोह को कुछ लोगों ने ऐतिहासिक और धार्मिक पुनरुत्थान के रूप में स्वीकार किया, जबकि कुछ वर्गों और विपक्षी नेताओं ने इसे संवैधानिक-दृष्टि और राजनीतिक सन्दर्भों में लेकर बहस की। आधिकारिक तौर पर आयोजकों ने इसे धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का जश्न बताया, और कई धर्म-गुरु तथा समाज के प्रतिनिधियों ने इसे समाजिक मेल-जोल और शांति-प्रतीक बताया। कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री ने उपस्थित जनसमूह का अभिवादन करते हुए यह क्षण “सदियों की आकांक्षा की पूर्ति” बताया।
समापन भावनात्मक व ऐतिहासिक संकेत
श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज का फहरना न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह उस सांस्कृतिक-ऐतिहासिक यात्रा का प्रतिक है जो अयोध्या से जुड़ी रही है। आयोजकों और प्रशासन ने इसे शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और श्रृंगारिक रूप में सम्पन्न कराने का दावा किया है। श्रद्धालुओं और दर्शकों के लिए यह दिन भावनात्मक था – मंदिर परिसर में ‘जय श्री राम’ के जयघोष के साथ यह अनुष्ठान सम्पन्न हुआ।