कनाडा के कामनास्किस में 16–17 जून को आयोजित हुए 51वें G7 शिखर सम्मेलन में नेताओं ने मध्य-पूर्व संघर्ष पर स्पष्ट रुख अपनाया। उन्होंने संयुक्त बयान जारी कर इज़राइल के आत्मरक्षा अधिकार को मान्यता दी और ईरान को “क्षेत्रीय अस्थिरता एवं आतंक का प्राथमिक स्रोत” करार दिया, साथ ही यह स्पष्ट किया कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनने चाहिए ।
इस बयान पर सबसे तेज़ प्रतिक्रिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दी। उन्होंने अचानक घोषित की गई बैठक से इतर G7 समिट से पहले ही निकलकर टकराव के बीच में वाशिंगटन लौटने का निर्णय लिया। ट्रंप ने इसकी स्पष्टीकरण में कहा कि उनका ध्यान अरबपति इलाके में शक्ति संतुलन और परमाणु समस्या हल करने के लिए रणनीतिमूलक बदलाव पर है, न कि सस्ते संघर्ष की माफी देने पर । उन्होंने इज़राइल के पक्ष में कटाक्ष किया और ट्विट में ईरानवासियों को “तुरंत तेहरान छोड़ देने” की सलाह दी ।
वहीं, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रेस से कहा कि ट्रंप ने G7 नेताओं की तरफ से एक Ceasefire प्रस्ताव रखा था, हालांकि ट्रंप ने इसका खंडन किया और इसे “ध्यान आकर्षित करने वाला बयान” बताया । इस बयान से G7 नेताओं के अंदर ट्रंप के साथ असहमति के संकेत मिले, परन्तु अंततः सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी रही।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस समिट में पक्ष अलग-थलग नजर आया। वे ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आवाज़ उठाने के लिए मौजूद थे। उनके दौरे की वजह से इन बैठकों में भारत की भागीदारी फिर से जगजीत हो रही है। कई विश्लेषकों ने इसे भारत-कनाडा सम्बन्धों के नए परिदृश्य की शुरूआत माना है, विशेष रूप से भारत और कनाडा में बसे विशाल भारतीय समुदाय के दृष्टिकोण से । उन्होंने G7 मंच के बहिर्मुख सत्रों में भारत की नीतियाँ साझा कीं और वैश्विक संवाद में भारत को सशक्त पैर रखने का संदेश दिया।
समिट से इतर, G7 नेताओं ने वैश्विक ऊर्जा बाजार सुरक्षा की भी जिम्मेदारी ली। कहा गया कि मध्य-पूर्व में युद्ध की आग से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, और यह स्वतंत्र बाजार व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा है ।
कुल मिलाकर, G7 समिट ने एक दोपक्षीय शक्ति संवाद का दृश्य पेश किया—जहाँ इज़राइल का समर्थन करने की प्रतिबद्धता, ईरान को नापसंद करने की तैयारियाँ, ट्रंप का विवादास्पद फैसला और मोदी का वैश्विक दक्षिण को मंच पर लाने का प्रयास सभी एक साथ नजर आए। यह समिट साबित करता है कि वैश्विक नेता अब ऊर्जा, सुरक्षा और परमाणु असमानता से जोड़कर कई मुद्दों पर संजीदगी से कदम उठा रहे हैं।
G7 2025 कनाडा में इज़राइल‑ईरान संघर्ष पर स्पष्ट सामूहिक संदेश देने वाला मंच साबित हुआ। ईरान पर कठोर रुख और इज़राइल के समर्थन की नीति, ट्रंप का अचानक रवैया और मोदी का दक्षिण‑पक्षीय रणनीति जोरदार तरीके से इसके मुख्य बिंदु रहे। यह समिट वैश्विक समर्थन की दिशा में एक निर्णायक मोड़ भी था।