नई दिल्ली/इस्लामाबाद:
हाल ही में हुए पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के प्रति अपना रुख और सख्त कर लिया है। इस हमले के जवाब में भारत सरकार ने पाकिस्तान जाने वाली सिंधु नदी की जलधारा को नियंत्रित करना शुरू कर दिया है, जिससे पाकिस्तान में हाहाकार मच गया है। जल संकट, सूखे खेत और बढ़ते दबाव के बीच, पाकिस्तान अब भारत से पानी की गुहार लगा रहा है।
क्या है मामला?
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में कई निर्दोष भारतीय नागरिकों की मौत हुई, जिससे पूरे देश में आक्रोश की लहर दौड़ गई। इस हमले के पीछे पाकिस्तान आधारित आतंकियों का हाथ बताया जा रहा है। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई स्तरों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया, जिनमें जल संधि का पालन सीमित करना एक बड़ी रणनीतिक कार्रवाई मानी जा रही है।
पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें
भारत की इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान के पंजाब, सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में कृषि संकट गहरा गया है। किसानों को फसल बचाने के लिए पानी नहीं मिल रहा और नहरें सूख रही हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान सरकार अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस मुद्दे को उठाने की योजना बना रही है, लेकिन भारत ने साफ किया है कि जब तक सीमा पार से आतंकवाद बंद नहीं होता, तब तक किसी भी प्रकार की राहत की उम्मीद न की जाए।
भारत का रुख
भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि के तहत अभी तक पाकिस्तान को जल आपूर्ति की अनुमति दी थी, लेकिन अब यह मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ गया है। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि “दहशतगर्दी और दोस्ती एक साथ नहीं चल सकती।”
रणनीतिक रूप से अहम कदम
विशेषज्ञों की मानें तो भारत का यह कदम सिर्फ जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संकेत है कि पाकिस्तान को अब अपने आंतरिक हालात सुधारने होंगे। जल संकट के जरिए भारत ने यह संदेश दिया है कि अब सहनशीलता की सीमा पार हो चुकी है।
भारत की तरफ से उठाया गया यह कदम पाकिस्तान के लिए चेतावनी है – अगर आतंक का समर्थन जारी रहा, तो संसाधनों पर निर्भरता भी संकट में पड़ सकती है। अब यह पाकिस्तान पर निर्भर करता है कि वह इस संकट को कूटनीति से सुलझाता है या फिर आने वाले दिनों में और भी बड़ी मुश्किलों के लिए तैयार रहता है।