19 जून 2025 की सुबह, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने इज़राइल पर बैलिस्टिक मिसाइलों की झड़ी चला दी जिससे बी॰ इज़राइल के दक्षिण में स्थित बीअर शेबा के प्रमुख सोरोका मेडिकल सेंटर सहित कई नागरिक इमारतों को भी भारी नुकसान पहुँचा। इस हमले में कम से कम 40 लोग घायल हुए, जबकि अस्पताल को गंभीर क्षति झेलनी पड़ी और उसे कुछ समय तक केवल जीवन-रक्षक आपात स्थितियों के लिए खोला गया ।
इस घातक हमले की पृष्ठभूमि में इज़राइल की ओर से 13 जून को ईरान के अराक हेवी वॉटर रिएक्टर पर हमला था, जिसे परमाणु हथियार कार्यक्रम से जोड़कर देखा जाता है। इस प्रतिक्रिया में इज़राइल ने पांचवे दिन ईरानी परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया, जिसमें अराक के साथ-साथ नतांज़ और इसफ़ाहान के साइट्स भी शामिल थे । उधर, ईरानी मिसाइल हमलों में दो दर्जन की जान गई है और इज़राइल में भी भारी संख्या में घायल सामने आए हैं ।
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हमले को घोर अपराध करार देते हुए कड़े शब्दों में जवाबी कार्रवाई की बात कही। उन्होंने ट्वीट में लिखा, “तेहरान के अत्याचारी इसका पूरा मूल्य चुकाएंगे” । रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने भी कहा कि आई.डी.एफ. को ईरान के परमाणु कार्यक्रम तथा उसके सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह खामेनी को जवाब देना होगा ।
इस घटना में सोरोका अस्पताल के एक दुर्घटना के रूप में विस्फोट की जानकारी मिल चुकी है; इसमें कभी-कोई रेडिएशन का खतरा नहीं था क्योंकि आकार की टार्गेट सीमा के भीतर था और क्षेत्र पहले ही खाली कराया गया था । इज़राइल में नागरिक सुरक्षा विभाग की मागेन डेविड आदोम ने बताया कि चार दर्जन से अधिक लोग हल्की या गंभीर चोटों के साथ अस्पताल पहुंचाए गए हैं । इसके अतिरिक्त, तेल अवीव, रमात गन और होलोन जैसे शहरों में भी इमारतें प्रभावित हुईं ।
इस तरह की सीधी मिसाइल टक्कर ने इस शैडो वार को एक पारंपरिक सैन्य संघर्ष की दिशा में ले जाने का संकेत दे दिया है। ईरान–इज़राइल की यह सीधी जंग दशकों में पहली बार दर्ज की गई है । वहीं, अमेरिकी मीडिया में संकेत है कि पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प भी इस पर नज़र बनाए हुए हैं, लेकिन यू.एस. ने फिलहाल सक्रिय हस्तक्षेप से पीछे हटकर कूटनीति को प्राथमिकता दी है । संघर्ष के चलते तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल आया है और यू.एस., रूस, चीन ने संयम की अपील की है ।
सोरोका अस्पताल पर हमला ईरान-इज़राइल की सीधी टकराहट का प्रतीक बन चुका है। इज़राइल ने कड़े शब्दों में जवाब की चेतावनी दी है और परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया है। अब सवाल यह है कि क्या यह संघर्ष और तेज होगा या वैश्विक दबाव पर कूटनीतिक रास्ता खोजा जाएगा।