लखनऊ | 27 अगस्त 2025
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ ने आज हवा को किसी पहाड़ी शहर जैसा साफ-सुथरा महसूस करवाया: वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) केवल 48 दर्ज हुआ, जो ‘अच्छा’ (Good) श्रेणी में आता है और ओटि (50), कोहिमा (68) व राजगीर (84) जैसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों को पीछे छोड़ता है ।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों अनुसार, अगस्त में अब तक के 26 दिनों में लखनऊ में 10 ‘गुड’ और 16 ‘सैटिसफेक्टरी’ वायु गुणवत्ता वाले दिन थे — सभी दिनों में AQI 90 से नीचे रहा ।
कारण: मॉनसून और स्वच्छ हवा
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी जेपी मौर्य कहते हैं,
“मॉनसून सबसे बड़ा स्वच्छकर्ता है — बारिश PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कणों को धरती पर ला देती है।”
उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि यह स्वच्छ दौर अल्पकालिक हो सकता है — जैसे ही मानसून पीछे हटेगा, यातायात और निर्माण कार्य से वायु प्रदूषण फिर बढ़ सकता है ।
सक्रीन पर, अलग-अलग सीमाओं वाले निगरानी स्टेशनों का AQI इस प्रकार था:
- कुकरैल: 31 (सबसे संभवत: सबसे स्वच्छ)
- गोंमती नगर: 41
- टाकतारा इंडस्ट्रियल ज़ोन: 53
- लालबाग: 56
- अलीगंज (कें. विद्यालय): 61
- बीआर अम्बेडकर स्टेशन: 59
ओटि की वायु गुणवत्ता कैसी है?
एचटी की रिपोर्ट में उल्लेख है कि लखनऊ आज ओटि से भी स्वच्छ है (ओटि AQI = 50), लेकिन ताज़ा आंकड़ों से पता चलता है कि ओटि में हाल में AQI 92 तक पहुंच चुका है, जो ‘मॉडरेट’ श्रेणी में है ।
सर्दियों में फिर बढ़ेगी समस्या
वायु प्रदूषण विशेषज्ञों के अनुसार, मॉनसून के बाद वायु दिशा बदलने एवं विज़ुअल पॉल्यूशन बढ़ने की संभावना होती है। इस बदलाव में वाहन उत्सर्जन, निर्माण, जलवायु परिवर्तनों के कारण वायु गुणवत्ताई स्तर पर असर सीधे पड़ता है। खासकर PM2.5 और PM10 जैसी सूक्ष्म कणों की मात्रा वृद्धि करता है, जिससे AQI फिर ‘मोरे बुरे’ स्तर (Unhealthy) में पहुंच सकता है ।
क्या सुरक्षित है बाहर जाना?
AQI 48 (‘गुड’) होने से आम लोगों के लिए बाहर निकलना पूरी तरह सुरक्षित है बाहर खेलना, सैर या व्यायाम सभी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं। हालांकि, साथी और छोटे बच्चों या बुज़ुर्गों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, जैसे हल्का शारीरिक व्यायाम व खुली हवा में अधिक समय बिताना ।
लखनऊ का आज का दिन वायु की दृष्टि से एक उपहार जैसा रहा — शहर की वायु गुणवत्ता हिल स्टेशनों से भी बेहतर रही। यह मॉनसून की देन है, जिसने एक बार फिर याद दिलाया कि बारिश हमारे वायु प्रदूषण के सबसे प्रभावी साझेदारों में से एक है।
लेकिन यह खुशी का पल अस्थायी हो सकता है। जैसे ही बरसात थमेगी, वायु प्रदूषण शहरी जीवन में फिर दस्तक दे सकता है। इसीलिए हम सबको चाहिए कि मॉनसून के बाद भी सतर्क रहें, सार्वजनिक वाहन उपयोग बढ़ाएं, और हवा को स्वच्छ रखने के प्रयास करें।