केरल की नर्स निमिषा प्रिया का यमन में मृत्युदंड टला

यमन में फाँसी की सजा काट रहीं केरल की नर्स निमिषा प्रिया की फांसी को 16 जुलाई से स्थगित किया गया है। राजनयिक प्रयास, धार्मिक हस्तक्षेप और ‘ब्लड मनी’ की बातचीत के चलते यह निर्णय लिया गया है।

कोच्चि / नई दिल्ली, 15 जुलाई 2025:
यमन की राजधानी सना स्थित केंद्रीय जेल में मृत्युदंड की सजा काट रहीं भारतीय नर्स निमिषा प्रिया की फांसी, जो 16 जुलाई को होने वाली थी, को स्थानीय अधिकारियों द्वारा अज्ञात समय तक स्थगित कर दिया गया है। यह जानकारी आज ANI और स्थानीय सूत्रों द्वारा दिल्ली में प्राप्त हुई, जिसे यमन की जेल प्रशासन ने औपचारिक रूप से मान्यता दी है

यह अचानक स्थगन, महीनों की राजनयिक कोशिशों, कानूनी प्रार्थनाओं और धार्मिक हस्तक्षेप का परिणाम है। केरल प्रदेश के मुख्यमंत्री पिनारायी विजयन और विपक्षी नेता वी.डी. सतिशी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे “एक बड़ी राहत” करार दिया है । मुख्यमंत्री ने कांतापुरम ए.पी. आबूबकर मुसलियार सहित सभी मानवतावादी कार्यकर्ताओं की भूमिका को सराहा और चार्ज किया कि इस जीत ने संयुक्त मानवता की ताक़त दिखाई है

  • धार्मिक हस्तक्षेप: सुन्नी धर्मगुरु कांतापुरम ए.पी. आबूबकर मुसलियार की पहल से यमन में मृतक तालाल अब्दो महदी के परिवार तक ‘ब्लड मनी’ प्रस्ताव पहुँचा, जिससे गंभीर बदलाव आया

  • राजनयिक कार्रवाई: भारत सरकार ने यमन प्रशासन, कोर्ट और यमन में कार्यरत भारतीय मिशन के साथ इन-पर्सन और वर्चुअल स्तर पर लगातार जुड़कर प्रयास किया

निमिषा की माँ प्रेमा कुमारी और पति टोमी थॉमस ने लटकते हुए निर्णय के बाद राहत में ‘युवा प्रयास जारी रखने’ की बात कही। टोमी ने कहा,

“इस निर्णय से हमें आशा मिली है। प्रयास अभी रुके नहीं हैं। हम इसे वापसी की दिशा में पहला कदम मानते हैं।”

सरकार की कानूनी टीम एवं सेव निमिषा प्रिया एक्शन काउंसिल अब ‘ब्लड मनी’ समझौते और स्थायी राजनयिक समाधान के लिए कार्यरत है, जिससे यह स्थगन स्थायी रूप में बदला जा सके

  • दियात सौदा: अब मृतक परिवार द्वारा ‘ब्लड मनी’ स्वीकार करने का वक्त और प्रक्रिया तय होगी।

  • कानूनी और कूटनीतिक फॉलो-अप: सुप्रीम कोर्ट और MEA के माध्यम से स्थायी समाधान की संभावना तलाशी जा रही है

  • धार्मिक और सामाजिक गठजोड़: मुसलियार जैसे धर्मगुरुओं का हस्तक्षेप अब भी इस प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभा सकता है

यह अगली रणनीति का पहला स्वागतयोग्य कदम है—स्थगित दोषी की वापसी नहीं, बल्कि उसे बचाने की कोशिश। यह पहल भारत की “वैश्विक नागरिक सुरक्षा” नीति और यमन युद्ध-क्षेत्र के बीच की राजनयिक सीमाओं को चुनौती देती है।

16 जुलाई अब एक निर्णायक दिन से बदलकर शुरूआती राहत का दिन बन गया है, लेकिन अगला कदम ही दिखाएगा कि यह स्थगन ‘जीवन की नई शुरुआत’ बनता है या फिर फिरकार की ठंडी साँस बनकर रह जाएगा