कोच्चि, 10 जुलाई 2025 — केरल की रहने वाली निमिषा प्रिया (38), जो 2017 में यमन में हत्या के आरोप में दोषी ठहराई गई थीं, को अब 16 जुलाई 2025 को मृत्युदंड दिया जा सकता है। मानवाधिकार कार्यकर्ता सैमुअल जेरेम लो, जिन्होंने निमिषा की मां का प्रतिनिधित्व किया है, ने यह जानकारी मीडिया को दी है ।
यमन की हेमिस्फियर की अस्पष्ट कूटनीतिक संरचना और हूती शासित क्षेत्र में राज्य-स्तरीय संबंधों की अनुपस्थिति, भारत के लिए एक सख्त चुनौती बन गई है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह यमन के प्रशासन, संयुक्त राष्ट्र और स्थानीय मानवाधिकार समूहों के साथ लगातार संपर्क में है, लेकिन परिस्थितियाँ बहुत जटिल हैं ।
- हत्या: निमिषा पर यह आरोप है कि उन्होंने अपने क्लिनिक पार्टनर तालाल अब्दो महदी को 2017 में जबरन सेडेटिव देने के बाद हत्या के षडयंत्र के साथ मौत के घाट उतारा था ।
- सजा और अपील: 2020 में एक ट्रायल कोर्ट ने उन्हें मृत्युदंड सुनाया, जिसे 2023 में हूती-शासित यमन की सुप्रीम ज्यूडिशल काउंसिल ने बरकरार रखा ।
- ब्लड मनी व माफी का विकल्प: यमन की कानून व्यवस्था के तहत पीड़ित का परिवार ‘ब्लड मनी’ (दियात) स्वीकार करे तो यह मृत्युदंड रोका जा सकता है, लेकिन अभी तक तालाल के परिवार ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है ।
भारत सरकार ने संसद में कहा कि वह निमिषा के परिवार और यमन सरकार को हर संभव मदद मुहैया करा रही है । निमिषा की माँ प्रेमा कुमारी दिसंबर 2024 से यमन में हैं और उन्होंने यमन की जेल में बेटी से मुलाकात की है। इसके अलावा उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से यात्रा की छूट भी मिली थी ।
सैमुअल जेरेम लो ने बताया है कि यमन में उनकी टीम तालाल के परिवार तक पहुंचने की कोशिश कर रही है—उनका कहना है,
“हमने 1 मिलियन डॉलर का प्रस्ताव रखा, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला। मैं अगले कुछ दिनों में पुनः यमन जाऊँगा” ।
भारत के पास व्यापक कूटनीतिक चैनल नहीं होने के कारण यह एक आख़िरी मौका माना जा रहा है—आपके परिवार की भूमिका, यूएन और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दबाव इस निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं।
16 जुलाई का दिन निमिषा प्रिया के लिए निर्णायक होगा। इस बीच, भारत सरकार, अंतरराष्ट्रीय समुदाय, मानवाधिकार समूह और परिवार इसके रोके जाने की अंतिम उम्मीद रखे हैं। यह मामला केवल एक व्यक्ति की जिंदगी का नहीं, बल्कि विदेशों में भारत की नागरिक सुरक्षा और कूटनीतिक क्षमता का भी परीक्षा बन गया है।