कोच्चि / नई दिल्ली, 11 जुलाई 2025:
यमन की राजधानी सना में मौत की सजा काट रही भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के परिवार ने कथित रूप से उनकी फांसी की तारीख 16 जुलाई तय होने की सूचना मिलने के बाद अपनी आखिरी उम्मीदें जागृत कर दी हैं। उनकी माँ प्रेमा कुमारी और पति टोमी थॉमस अब अंतिम दिनों में हर राजनीतिक, कानूनी तथा मानवीय विकल्प तलाश रहे हैं ।
परिवार के प्रयास और कानूनी मोर्चा
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सुप्रीम कोर्ट में अपील: “सेव निमिषा प्रिया एक्शन काउंसिल” द्वारा उठाई गई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को सुनवाई निर्धारित की है। इसमें भारत सरकार को राजनयिक रूप से हस्तक्षेप करने का निर्देश जारी करने की मांग की गई है ।
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राजनीतिक हस्तक्षेप:
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मेहबूबा मुफ़्ती (PDP) ने विदेश मंत्री से तुरंत हस्तक्षेप की अपील की और महिलाओं से ‘ब्लड मनी’ (दियात) इकट्ठा करने की अपील की है ।
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सपा सांसद आंलाथूर से K. राधाकृष्णन (CPM) ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर निमिषा की रिहाई या सज़ा कम किए जाने की मांग की—संकेत देते हुए कि अपराध व्यक्तिगत उत्पीड़न और घरेलू संकट की परिणति था
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परिवार का दावा है कि उन्होंने व्यवसायिक साझेदारी तालाल अब्दो महदी के साथ शुरू की थी, लेकिन बाद में उस द्वारा की गई मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न, पासपोर्ट जब्ती और गैर कानूनी नियंत्रण की वजह से स्थिति बिगड़ गई ।
आरोप है कि जिस प्रयास में उन्होंने महदी को सेडेटिव देकर पासपोर्ट प्राप्त करने की कोशिश की थी, वह विफल हुई और एक अनजाने में ओवरडोज़ से उसकी मृत्यु हो गई—जिस पर उन्हें 2020 में मौत की सजा सुनाई गई और 2023 में यमन की सुप्रीम ज्यूडिशल कौंसिल ने अपील खारिज की गई थी । यमन की शरिया आधारित न्याय व्यवस्था में मृत्युदंड को “ब्लड मनी” (दियात) के माध्यम से टाला जा सकता है—जहाँ मृतक के परिवार की बात सुनी जाती है और वे माफ़ी देने पर लालचनीय मुआवज़ा लेते हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ता सैमुअल जेरोम, जो निमिषा की ओर से बातचीत में लगे हैं, का कहना है कि परिवार ने $1 मिलियन रुपए ($8.5 करोड़) का प्रस्ताव रखा था, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है । टोमी थॉमस का कहना है कि जेल प्रशासन ने उन्हें वॉट्सएप पर ही तारीख की सूचना दी—जिससे निमिषा की मानसिक स्थिति बहुत नाजुक हुई। उन्होंने कहा कि भारत सरकार और केरल राज्य प्रशासन से उन्हें आश्वासन मिला है कि हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं । यद्यपि भारत सरकार ने अभी तक फसल भूमिका में संपर्क की पुष्टि नहीं की, लेकिन MEA लगातार इस मामले पर नजर बनाए हुए है, हालांकि हूथी-शासित यमन में कोई औपचारिक संबंध नहीं है, जिससे राजनयिक प्रयासों में बाधा बनी हुई है ।
16 जुलाई की तय संभावित फांसी की तारीख के बीच, निमिषा प्रिया का परिवार और देश भर में समर्थक एक आख़िरी प्रयास में जुटे हैं—कहीं राजनयिक या कानूनी क़दम, कहीं ब्लड मनी की बातचीत, और कहीं सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के जरिए इंसाफ की उम्मीद। यह संकट सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि विदेशों में काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा और सरकार की क्षमता का भी कसौटी साबित हो सकता है।