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ऑपरेशन सिंदूर के बाद पीएम मोदी का पहला विदेश दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 15 जून से 19 जून तक साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया का एक ऐतिहासिक दौर करेंगे, जो भारत के विदेश नीति में एक नये दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह यात्रा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ऑपरेशन सिंदूर के बाद उनका पहला विदेश दौरा है और साथ ही कनाडा में आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में उनकी उपस्थिति द्विपक्षीय संबंधों को पुनः स्थापित करने का अवसर देगी।

साइप्रस दौरे के दौरान मोदी पहले ही किसी अन्य भारतीय प्रधानमंत्री की तुलना में सबसे पहले इस भूमध्यसागरीय देश का दौरा करेंगे—यह भारत-साइप्रस रिश्तों को एक नई स्थायी गहराई प्रदान करेगा। वे निकोसिया में राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलिडेस के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे और लिमासोल में व्यापारिक नेताओं को संबोधित करके मेहनत व निवेश के नए द्वार खोलने की दिशा में संकेत देंगे

इसके बाद उनका अगला पड़ाव कनाडा होगा, जहाँ वे 16–17 जून को अल्बर्टा के कनानस्किस में आयोजित होने वाले G7 सम्मेलन में शामिल होंगे। जो स्कैंडल—कनाडा और भारत के बीच कुख्यात तनाव—के बाद यह मोदी का पहला दौरा रहेगा। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी द्वारा आमंत्रण को मोदी ने स्वीकार कर लिया है और कनाडा की यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों को फिर से सुधारने का पथ कहा जा रहा है । G7 मंच को मोदी ऊर्जा सुरक्षा, तकनीक, नवाचार और AI-ऊर्जा Nexus पर भारत की दृष्टि को साझा करने के लिए आदर्श अवसर मानते हैं

मोदी की अगली यात्रा 18 जून को क्रोएशिया की राजधानी ज़ाग्रेब होगी, जो किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला सरकारी दौरा होगा। क्रोएशियाई पीएम एंड्रेय प्लेन्कोविक और राष्ट्रपति ज़ोरान मिलानोविक से मुलाकातों के दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक, औद्योगिक तथा कांग्रेस स्तर पर मैत्री संबंधों को मजबूती मिली जाएगी।

यह यूरोपीय दौर न केवल भारत की कूटनीतिक रणनीति को उजागर करता है, बल्कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान के साथ तनाव की पृष्ठभूमि में यह संकेत देता है कि भारत अब आतंकवाद पर अपनी वैश्विक आवाज को और ऊँचा उठाते हुए साझेदार देशों से सहयोग चाहता है

अंत में, यह दौरा सिर्फ एक राजनयिक मिशन नहीं, बल्कि भारत की वैश्विक महत्वाकांक्षा को दर्शाने वाला कदम भी है। भारत के यूरोप-मध्य दूरी तक पहुंचने का प्रयास, वैश्विक मंच पर उसके योगदान को नई ऊर्जा दे रहा है। साइप्रस, कनाडा और क्रोएशिया में वार्ताओं तथा G7 सम्मेलन में संवाद के जरिए भारत विश्वसनीय साझेदार बनकर उभर रहा है। यह यात्रा वैश्विक मंच पर भारत की संवाद नेतृत्व की नई शुरुआत है।

यह तीन-देशीय दौरा:

  • ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश नीति में रणनीतिक पुनर्स्थापन का संकेत है,

  • द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मंच पर भारत की भूमिका को सशक्त करेगा,

  • और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ वैश्विक ताकत और पश्चिमी समर्थन हासिल करने की दिशा में एक बड़ी पहल है।