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प्रधानमंत्री मोदी का 10 वर्षों में सबसे लंबा विदेश दौरा आज से: आठ दिन, पाँच देश, दो महाद्वीप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात नई दिल्ली से रवाना होकर 2 जुलाई की सुबह घाना की राजधानी अक्रा पहुँचेंगे और अपनी ताज़ा कूटनीतिक पारी की शुरुआत करेंगे। यह यात्रा कुल आठ दिन चलेगी और पाँच देशों—घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राज़ील तथा नामीबिया—को कवर करेगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार यह पिछले एक दशक में मोदी की सबसे लंबी विदेश यात्रा है; इससे पहले 2014 में म्यांमार‑ऑस्ट्रेलिया‑फिजी का 11‑दिन का दौरा उनकी सबसे लम्बी लगातार विदेश मौजूदगी थी।

घाना (2‑3 जुलाई)

दौरे का पहला चरण घाना का है, जहाँ किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह तीन दशक बाद पहला द्विपक्षीय दौरा होगा। प्रधानमंत्री घाना के राष्ट्रपति नाना अकुफो‑आडो से मुलाक़ात कर ऊर्जा, रक्षा और व्यापार सहयोग पर वार्ता करेंगे, साथ ही अक्रा में प्रवासी भारतीयों को संबोधित भी करेंगे।

त्रिनिदाद और टोबैगो (3‑4 जुलाई)

अगले पड़ाव में मोदी कैरिबियाई द्वीप राष्ट्र त्रिनिदाद और टोबैगो पहुँचेंगे—जहाँ 1999 के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा होगी। प्रधानमंत्री संयुक्त संसद सत्र को संबोधित करेंगे और भारतीय मूल के बड़े प्रवासी समुदाय से संवाद करेंगे।

अर्जेंटीना (4‑5 जुलाई)

ब्यूनस आयर्स में प्रधानमंत्री की मुलाक़ात राष्ट्रपति हावियर मिलेई से होगी। वार्ताएँ ऊर्जा, खेती, खनन, नवीकरणीय स्रोत और आईटी सहयोग पर केन्द्रित रहेंगी। दोनों पक्ष रक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में भी नये समझौते पर काम कर रहे हैं।

ब्राज़ील (5‑8 जुलाई) – BRICS शिखर सम्मेलन

यात्रा का सबसे दीर्घ चरण ब्राज़ील है, जहाँ रियो डी जनेरियो में 17वाँ BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। मोदी, राष्ट्रपति लुईज़ इनासियो लूला दा सिल्वा के साथ वैश्विक शासन‑सुधार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जिम्मेदार उपयोग, जलवायु कार्रवाई और वैश्विक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे। रियो के बाद ब्राज़ीलिया में उनका राजकीय दौरा भी निर्धारित है, जिसमें व्यापार, रक्षा और अंतरिक्ष सहयोग को विस्तार देने पर साझी रणनीति बनेगी।

नामीबिया (9 जुलाई)

अंतिम चरण में प्रधानमंत्री विंडहोक पहुँचेंगे और नव-निर्वाचित राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदी‑नदैतवाह से भेंट करेंगे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की नामीबिया को तीसरी यात्रा होगी। दोनों नेता हरित‑हाइड्रोजन, हीरा‑माइङ, रक्षा प्रशिक्षण तथा ‘चीता परियोजना’ जैसे वन्यजीव संरक्षण अभियानों पर समझौते कर सकते हैं।

दौरे का महत्व

  1. ग्लोबल साउथ का एजेंडा: घाना, नामीबिया और त्रिनिदाद जैसे देशों तक पहुँच भारत की ‘वैश्विक दक्षिण नेतृत्व’ रणनीति का हिस्सा है, जिससे संयुक्त राष्ट्र सहित बहुपक्षीय मंचों पर व्यापक समर्थन सुनिश्चित हो सके।

  2. कूटनीतिक संतुलन: अर्जेंटीना और ब्राज़ील के साथ गहरा आर्थिक तालमेल भारत‑लैटिन अमेरिका संबंधों में नया अध्याय जोड़ेगा, वहीं अफ्रीकी साझेदारों के साथ ऊर्जा‑सुरक्षा और खनिज आपूर्ति शृंखला को मज़बूत किया जाएगा।

  3. दोहरे महाद्वीपीय फोकस: महज़ आठ दिनों में दो महाद्वीपों की यात्रा और BRICS शिखर सम्मेलन में भागीदारी दर्शाती है कि सरकार ‘मैराथन‑डिप्लोमेसी’ के ज़रिये सीमित समय में अधिकतम राजनीतिक‑आर्थिक लाभ लेने की नीति पर कायम है।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि हर देश में आयोजित व्यापार मंचों, विश्वविद्यालय सम्बोधनों और प्रवासी‑सम्मेलनों के ज़रिये प्रधानमंत्री 50‑से अधिक सार्वजनिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह दौरा भारत को अफ्रीका‑कैरिबियन‑लैटिन अमेरिकी त्रिकोण में रणनीतिक गहराई देगा और BRICS के भीतर उभरती चुनौतियों—जैसे सदस्य‑विस्तार व नई भुगतान व्यवस्था—पर भारत का प्रभावशाली पक्ष रखेगा।

साथ ही, यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पश्चिमी साझेदारों के साथ रिश्ते पुनर्गठित कर रहा है; इसलिए नई दिल्ली के लिए यह दौरा सामरिक छवि और आर्थिक कूटनीति दोनों ही मोर्चों पर निर्णायक माना जा रहा है।