इस्लामाबाद।
पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस (Nur Khan Airbase) को लेकर हाल के दिनों में कई चौंकाने वाले दावे सामने आ रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और स्थानीय सूत्रों के हवाले से खबरें हैं कि इस रणनीतिक रूप से अहम एयरबेस पर अमेरिकी नियंत्रण या उपस्थिति बढ़ रही है। यह मुद्दा अब पाकिस्तान की सुरक्षा और विदेशी नीति को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है।
नूर खान एयरबेस क्या है?
नूर खान एयरबेस पाकिस्तान के रावलपिंडी शहर में स्थित है और इसे पहले चकला एयरबेस के नाम से जाना जाता था। यह एयरबेस पाकिस्तान वायुसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और राजनीतिक, सैन्य और खुफिया मिशनों के संचालन में एक प्रमुख भूमिका निभाता है।
🇺🇸 अमेरिका की मौजूदगी का दावा
रिपोर्ट्स के अनुसार, नूर खान एयरबेस पर अमेरिकी कर्मियों की आवाजाही, विशेष विमानों की लैंडिंग-टेकऑफ और हाई-टेक उपकरणों की तैनाती देखी गई है। हालांकि पाकिस्तान सरकार या सेना ने अभी तक इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह एक बैकडोर डील का हिस्सा हो सकता है।
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि अमेरिका यहां से ड्रोन मिशनों, इंटेलिजेंस ऑपरेशनों और मध्य एशिया की निगरानी जैसे काम कर रहा है।
पाकिस्तान में उठ रहे सवाल
पाकिस्तान में विपक्षी दल और सोशल मीडिया यूजर्स इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। यह सवाल लगातार उठ रहा है कि:
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क्या नूर खान एयरबेस पर अमेरिकी गतिविधियों की अनुमति दी गई है?
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क्या यह पाकिस्तान की संप्रभुता के खिलाफ है?
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क्या इसके बदले में कोई आर्थिक या सैन्य सहायता दी जा रही है?
पूर्व राजनयिकों और रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका को इस एयरबेस का उपयोग करने की छूट दी गई है, तो यह एक रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा करता है।
अमेरिका की रणनीति क्या हो सकती है?
अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बाद अमेरिका सेंट्रल और साउथ एशिया में नए बेस और निगरानी केंद्रों की तलाश में है। ऐसे में पाकिस्तान का नूर खान एयरबेस, जिसकी स्थिति अफगान सीमा के नजदीक है, एक आदर्श स्थान बन सकता है।
इस बेस के जरिए अमेरिका को ईरान, चीन और अफगानिस्तान पर निगरानी रखने की सुविधा मिल सकती है।
पाकिस्तान सरकार की चुप्पी
अब तक पाकिस्तान की सैन्य या असैन्य सरकार की ओर से कोई ठोस बयान नहीं आया है। यह चुप्पी ही इस मुद्दे को और ज्यादा रहस्यमय और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना रही है।
नूर खान एयरबेस पर अमेरिका की कथित मौजूदगी पाकिस्तान की रणनीतिक संप्रभुता और विदेश नीति की पारदर्शिता पर कई सवाल खड़े करती है। यदि इस तरह की गतिविधियां वाकई चल रही हैं, तो यह पाकिस्तान के भीतर एक नया राजनीतिक भूचाल पैदा कर सकती हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान सरकार इस मुद्दे पर खुलकर सामने आती है या चुप्पी ही बनाए रखती है।