किसानों के मसीहा की 33वीं पुण्यतिथि, क्यों किया जाता हैं याद…

किसानों के मसीहा की 33वीं पुण्यतिथि, क्यों किया जाता हैं याद...
किसानों के मसीहा की 33वीं पुण्यतिथि, क्यों किया जाता हैं याद…

लखनऊ: देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं किसान और मजदूरों की आवाज़ को बुलंद करने वाले स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की आज 33वीं पुण्यतिथि हैं। 23 दिसंबर 1902 को चरण सिंह ने गाजियाबाद जिले के नूरपुर गांव में एक जाट परिवार में जन्म लिया था। चरण सिंह ने आगरा विश्वविद्यालय से लॉ की डिग्री हासिल कर1928 से गाजियाबाद में वकालत के व्यवसाय में अपना पहला क़दाम रखा। इसके बाद चरण सिंह ने आजादी के आंदोलन से राजनितिक करियर की शुरुआत की। उनके पिता चौधरी मीर सिंह ने चरण सिंह के जन्म के 6 साल बाद सपरिवार नूरपुर से जानी खुर्द गांव में रहने का निर्णय लिया।

3 अप्रैल 1967 को चौधरी चरण सिंह का चेहरा पहली बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में सामने आया । 17 अप्रैल 1968 को उन्होंने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया जिसके बाद मध्यावधि चुनाव में उन्हें अच्छी सफलता के साथ 17 फरवरी 1970 को दोबारा मुख्यमंत्री के पद पर स्वीकार किया गया। चौधरी चरण सिंह के लिए हुए फैसले सत्ता से ज्यादा महत्व किसान रखते थे। वे अपने सिद्धांतों व मर्यादित आचरण से कभी न समझौता करने वाले इंसान के रूप में जाने जाते थे।

1977 में चरण सिंह मोरारजी देसाई के नेतृत्व की सरकार में उप-प्रधानमंत्री के रुप में सामने आए और इंदिरा गांधी की कांग्रेस सरकार के खिलाफ अपनी आवाज को बुलंद किया। आजादी के आंदोलन से लेकर इंदिरा गांधी के आपातकाल के खिलाफ जारी लड़ाई में वें सबसे आगे खड़े नजर आए। दरअसल 1975 में इंदिरा गाँधी द्वारा लगाई गई इमर्जेंसी का विरोध करने के कारण चरण सिंह को जेल जाना पड़ा था।

मोरारजी देसाई दवारा सत्ता छोड़े जाने पर कांग्रेस के समर्थन से चौधरी चरण सिंह के प्रधानमंत्री बनने का सपना साकार हुआ जिसके महज़ 5 दिन बाद उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा।

1977 में हुए लोकसभा के चुनाव में इंदिरा गाँधी को करारी हार का सामना करना पड़ा और देश में पहली बार गैर-कांग्रेसी पार्टियों ने मिलकर सरकार बनाई। जिसके बाद जनता पार्टी का गठन हुआ मोरारजी देसाई को प्रधानमंत्री का पद सौंपा गया। उप-प्रधानमंत्री और गृहमंत्री की कुर्सी सम्भालने के लिए चौधरी चरण सिंह को चुना गया। हालांकि, पार्टी में आपसी मतभेद के कारण मोरारजी की सरकार गिर गई। वित्त मंत्री रहते हुए चरण सिंह ने खाद और डीजल के दामों को कंट्रोल करने के कई प्रयास किए साथ ही खेती के मशीनों पर कर का बोझ कम करने का काम किया।

चरण सिंह की 6 संतानों में से एक चौधरी अजित सिंह हैं, जो फिलहाल राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष के पद पर हैं। राष्ट्रीय लोकदल के एजेंडे में आज भी किसान शामिल हैं, जिसकी बाग़-डोर उन्होंने अपने बेटे अजीत सिंह को 29 मई 1987 को आखिरी सांस लेते वक्त सौपी।