मुंबई / नई दिल्ली, 27 जुलाई 2025 – बॉलीवुड के जाने-माने एक्शन डायरेक्टर Sham Kaushal की ज़िंदगी संघर्ष और रोमांच दोनों से भरी रही है। उन्होंने मुंबई में अपने करियर की शुरुआत साल 1978 में मात्र ₹3,000 का कर्ज़ लेकर की थी, और शुरुआती दिनों में ₹350 मासिक कमाई पर Re 1 के भोजन पर जीवन यापन किया। आज, उनका बेटा विकी कौशल फिल्म ’छावा’ की सफलता से चमक रहा है, जिसने दुनिया भर में ₹800 करोड़ से अधिक की कमाई की है, और यह समग्र यात्रा प्रेरणादायक बन गई है।
शुरूआत में Sham Kaushal का उद्देश्य महाराष्ट्र के एक कॉलेज में अंग्रेज़ी साहित्य का प्रोफ़ेसर बनना था। पंजाब से मुंबई आए, लेकिन आर्थिक असुविधाओं के कारण वे इसी राह से हट गए। 1978 में सिर्फ ₹3,000 (जो उनके पिता ने उधार दिए थे) लेकर शहर आए। उन्होंने Chembur में एक कार्यालय में ₹350 महीने की नौकरी शुरू की, और दो बस, एक ट्रेन की यात्रा करते हुए रोज़मर्रा की ज़िंदगी जीते—जिसमें दोपहर और रात के खाने के लिए सिर्फ Re 1 होता था। Misal pav या batata vada जैसे सस्ते व्यंजनों पर निर्भर रहते थे; सिगरेट न खरीद पाने की वजह से 10 पैसे की बीड़ी पीते थे। समय की घटिया परिस्थितियों में बैठे, वे ऑफिस में ही रहते और दो कपड़े (दो पैंट, तीन शर्ट) ही उनके पास होते थे।
इस संघर्ष के बीच, उन्होंने अपने पैरों पर खड़े होने का दृढ़ निश्चय किया “मैं नौकरी नहीं करूँगा और मुंबई नहीं जाऊँगा”, ये उन्होंने स्वयं से वादा किया। फिर एक संयोग से, पंजाबी संगीन स्टंटमैन एसोसिएशन से जुड़ने का मौका मिला और शीघ्र ही उन्होंने Veeru Devgan के साथ काम करना शुरू किया। unpaid assistant के रूप में उन्होंने कड़े शारीरिक काम किए—कैफींडा से चाय लाना, बैग ले जाना जिससे उन्होंने फिल्म उद्योग में अपनी जगह बनाई। बाद में Sunny Deol की फिल्म Betaab (1983) के लिए उन्होंने पहली बार ₹500 कमाए वह उस समय उनकी सबसे बड़ी तैनाती थी और करियर में एक दमदार मोड़ बनी ।
वर्तमान में Sham Kaushal ने न सिर्फ एक सफल करियर बनाया, बल्कि उनके बेटे Vicky Kaushal ने बॉलीवुड में अलग मुकाम हासिल किया है। उनकी हालिया फिल्म ‘छावा’ ने विश्वव्यापी बॉक्स ऑफिस पर ₹800 करोड़ से अधिक का कलेक्शन दर्ज किया जो उन्हें सुपरस्टार अभिनेता की श्रेणी में स्थापित करता है। इस प्रदर्शन को देखते हुए यह परिवार की सफलता की कहानी उसी संघर्ष भरे सफ़र का प्रतिफल नज़र आती है ।
प्रेरणा होती रही—कड़ी मेहनत, सब्र और संयम
Sham Kaushal ने कैंसर जैसी बीमारी से जूझते हुए भी अपनी कमजोरियों को दर्शकों से छुपाते हुए काम किया। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि उन्होंने सिर्फ “10 साल और अपनी नई पीढ़ी को सँवार दूँगा” की प्रार्थना की और वह शुरूआती दशक धीरे-धीरे दो दशक में तब्दील हो गया। यह दृढ़ता उनकी सफलता की असली कुंजी रही ।
आज वो एक सम्मानित एक्शन डायरेक्टर के रूप में फिल्म उद्योग में अपनी पहचान बनाए हुए हैं, और उनके बेटे का ब्लॉकबस्टर काम परिवार और मुंबई से जुड़े हर संघर्षकर्ता को प्रेरणा देता है।
Sham Kaushal की कहानी यह सिद्ध करती है कि गरीबी, संघर्ष और स्वास्थ्य संकट के बीच भी अगर दृढ़ संकल्प एवं मेहनत हो, तो सफलता निश्चित है। ₹350 महीने की कमाई व Re 1 के भोजन से शुरू हुआ उनका सफर, आज ₹800 करोड़ की ब्लॉकबस्टर फिल्म परिवार तक पहुंच चुका है। यह सिर्फ एक फिल्म की सफलता नहीं, बल्कि जीवन की मेहनत से मिली मानवीय सम्मान का प्रतीक भी है।
उनकी इस उपलब्धि से यह संदेश मिलता है कि संघर्ष को सहना या समझौता करना नहीं, बल्कि उसे दिशा देना ही मंजिल तक पहुँचने का मार्ग है। यह परिवार की कहानी भारतीय फिल्म उद्योग में सदियों तक याद रखी जाएगी।