महिला दिवस के अवसर पर जानें अपने खास अधिकारों के बारे में, कहीं आप इनसे अनजान तो नहीं

भारतीय संविधान हर एक नागरिक को चाहे वह पुरुष हो या महिला हो समानता का अधिकार प्रदान करता है। वहीं अगर महिलाओं की बात आए तो उन्हें कई खास अधिकार भी दिए गए हैं। इसलिए अब महिलाओं के साथ भेदभाव के मामलों के खिलाफ भी कानून हैं, महिलाओं के खिलाफ हिंसा, शोषण और शारीरिक शोषण के लिए भी कानून भी बनाए गए हैं। यहां हम अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आपको बता रहे हैं कुछ ऐसे कानून और अधिकारों के बारे में जिनसे सभी महिलाएं शायद अवगत ना हों लेकिन आपको उनकी जानकारी जरूर होनी चाहिए।

अपने पसंद की शादी
हर वो लड़की जो 18 साल से अधिक उम्र की है उसे अपनी पसंद के लड़के से शादी करने का पूरा अधिकार है। एक मान्य शादी के लिए लड़की की सहमति का होना बेहद मायने रखता है। किसी को भी उसकी इच्छा के अनुसार शादी करने का दबाव बनाने का अधिकार नहीं है।

एक से अधिक शादी
भारतीय संविधानिक कानून के मुताबिक एक महिला के पति को पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने का अधिकार नहीं है। अगर पहली पत्नी के रहते वह दूसरी शादी करता है तो वह सजा का पात्र है।

NO कहने का पूरा अधिकार
हर लड़की का अपने शरीर पर पूरा अधिकार होता है। और उसकी इच्छा के बिना कोई भी उसके साथ शरीरिक संबंध नहीं बना सकता है। अगर शादी के बाद भी पति उसकी इच्छा के खिलाफ उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता तो ऐसे में वह भी कानून की नजर में दोषी है। डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट 2005 के तहत धारा 18 उसे दोषी करार देती है। अगर कोई महिला घरेलु हिंसा का शिकार होती है तो वह उसके खिलाफ आवाज उठा सकती है।

शादी से नाखुश तो ये अधिकार
अगर कोई महिला अपनी शादी से खुश नहीं है और वह शादी से अलग होना चाहती हैतो उसे अपने पति को तलाक देने का पूरा हक है। अगर किसी लड़की की 15 साल में शादी कर दी जाती है तो उसे अपनी सुरक्षा को लेकर कुछ खास अधिकार दिए गए हैं।

निजी सुरक्षा का अधिकार
अपनी सुरक्षा करने के लिए हर युवती और लड़की को बलपूर्वक अपनी रक्षा करने का अधिकार है। रेप, अप्राकृतिक सेक्स, किडनैपिंग के खिलाफ भी यहां महिलाओं को आवाज उठाने का पूरा हक है और वे इसके खिलाफ अपनी इच्छानुसार कदम उठा सकती है। अगर कोई उनका पीछा कर रहा है तो आप उसे आईपीसी की धारा 354डी के तहत कानून के दायरे में खड़ा कर सकती हैं। इसके अलावा अगर आपकी सहमति के बिना छुप छुपाके आपके साथ गलत कर रहा है तो आप उसे आईपीसी की धारा 354सी के खिलाफ सजा दिलवा सकती हैं।

वर्कप्लेस पर हैं ये अधिकार
वर्प्ललेस पर महिला कर्मचारियों को बाकी मेल कर्मचारियों के बराबर का वेतन पाने का अधिकार है। इसके अलावा प्रेग्नेंट महिलाओं को 26 सप्ताह का मैटरनिटि लीव पाने का भी स्पेशल अधिकार है। यह सरकारी और निजी दोनों तरह के वर्कप्लेस पर समान अधिकार का प्रावधान है।

गोद लेने का अधिकार
कोई महिला सिंगल है या मैरिड, उसे अपनी इच्छानुसार बच्चा गोद लेने का भी पूरा अधिकार है यहां शर्त ये है कि महिला की उम्र 21 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। इसके अलाला ये भी प्रावधान है कि बच्चे की उम्र 3 महीने तक होनी चाहिए।

ये कानूनी अधिकार
सभी महिलाओं को उनकी इनकम के आधार के बिना ही उन्हें कानूनी सहायता पाने का पूरा अधिकार है। इसके अलावा उन्हें एफआईआर दर्ज करवाने की भी पूरा पूरा अधिकार है। अगर कोई पुलिस पीड़ित महिला का एफआईआर दर्ज करने से मना कर देता है तो वह आईपीसी की धारा 166 ए के तहत कानून का मुजरिम है। किसी भी महिला को रात में गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है। भारतीय संविधानिक कानून इसकी इजाजत नहीं देता है।