भारत विधिताओं का देश है। यहां विभिन्न तरह की सांस्कृतिक, भाषाई विविधता ही नहीं देखने को मिलती, बल्कि पूजा पद्धति और परंपराओं में भी खासा बदलाव देखने को मिलते हैं। केरल में ‘दुर्योधन’ का मंदिर इसी को बयां करता है। पीढ़ियों से हम सभी दुर्योधन के बारे में जो जानते-सुनते आ रहे हैं, वह उसकी नकारात्मक छवि को ही दर्शाता है, लेकिन केरल में कुछ लोग उसे भगवान की तरह पूजते हैं और वह भी अनूठे अंदाज में।
केरल में दुर्योधन को समर्पित यह मंदिर कोल्लम जिले के एडाक्कड़ में है, जो दक्षिण भारत में कौरवों के प्रमुख दुर्योधन का एकमात्र मंदिर है। पोरूवाझी पेरुविरुथि मलानाडा दुर्योधन मंदिर में लोग अनूठे अंदाज में अपने अराध्य की पूजा करते हैं। वे उन्हें शराब अर्पित करते हैं। बीते शुक्रवार को जब यहां वार्षिकोत्व की शुरुआत हुई तो यहां ओल्ड मॉन्क की 101 बोतलें करीने से रखी देखी गईं और लोग श्रद्धापूर्वक अपने अराध्य को याद करते दिखे।
इसके पीछे एक पौराणिक कथा है। माना जाता है कि दुर्योधन एक बार इस गांव पहुंचा था और तब वह बहुत प्यासा था। वह एक घर में गया और वहां पानी के लिए पानी मांगा, जिस पर उसे ताड़ी दिया। उसे इसका स्वाद बहुत पसंद आया। यहां लोग इसी मान्यता को ध्यान में रखते हुए दुर्योधन को शराब अर्पित करते हैं। उनकी मान्यता है कि ऐसा करने से उनके अराध्य उन्हें हर तरह की मुश्किलों से दूर रखेंगे।
‘TOI’ ने मंदिर के सचिव एसबी जगदीश के हवाले से दी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस मंदिर में ताड़ी और शराब चढ़ाई जाती रही है। इसके अलावे पान, चिकन, बकरी, सिल्क के कपड़े आदि भी यहां चढ़ाए जाते रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यहां सभी धर्मों के लोग पूजा करते हैं और श्रद्धालु अपने अराध्य दुर्योधन को ‘अप्पोपन’ के नाम से बुलाते हैं। लोग विदेशों से आने पर भी यहां आते हैं और मंदिर में तरह-तरह की शराब चढ़ाते हैं।