देश के 18 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों की 91 लोकसभा सीटों के लिए गुरुवार को पहले चरण का मतदान संपन्न हुआ। पश्चिम बंगाल में मतदान प्रतिशत जहां सर्वाधिक 81 प्रतिशत रहा, वहीं पड़ोसी राज्य बिहार की चार लोकसभा सीटों के लिए हुए मतदान का प्रतिशत सर्वाधिक कम महज 50 प्रतिशत है। बिहार का मतदान प्रतिशत जम्मू एवं कश्मीर से भी कम रहा, जिसके कुछ हिस्से अशांत हैं। यहां दो सीटों- बारामूला और जम्मू के लिए मतदान संपन्न हुआ, जिसके लिए मतदान प्रतिशत करीब 57 रहा।
बिहार में मतदन का प्रतिशत इतना कम क्यों रहा? लोग वोट डालने के लिए घरों से बाहर क्यों नहीं निकले? आम तौर पर ऐसा माना जाता है कि मतदान का कम प्रतिशत व्यवस्था में परिवर्तन के प्रति वोटर्स की उदासीनता को दर्शाता है। तो क्या बिहार में बदलाव की बयार नहीं है? यहां मतदाता राजनीतिक नेतृत्व में बदलाव के इच्छुक नहीं हैं? अगर इस तर्क को मानें कि अधिक मतदान प्रतिशत मतदाताओं में बदलाव के रूझान को दर्शाता है तो बिहार के वोटर्स किसी बड़े परिवर्तन को लेकर बहुत इच्छुक नहीं हैं।
बिहार में कम मतदान प्रतिशत मतदाताओं को वोट डालने के प्रति जागरूक करने के लिए निर्वाचन आयोग की तमाम कोशिशों के प्रति वोटर्स की उदासीनता को भी दर्शाता है। यूं तो वोट डालने के लिए मतदाताओं को हमेशा से प्रेरित किया जाता रहा है और उन्हें एक-एक मतदान की अहमियत भी बताई जाती रही है, पर 2014 से इसमें और तेजी आई है। निर्वाचन आयोग ने लोगों तक पहुंचने वाले विभिन्न संपर्क माध्यमों का इस्तेमाल कर वोटर्स को यह बताने की कोशिश की कि उनका एक-एक वोट कितना महत्वपूर्ण है।
अखबारों और टेलीविजन पर विज्ञापन के अतिरिक्त सोशल मीडिया, पैम्फ्लेट्स के जरिये भी मतदाताओं को मतदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके बावजूद बिहार में जिस तरह मतदान का प्रतिशत केवल 50 रहा, उससे जाहिर होता है कि निर्वाचन आयोग के इन कदमों से भी यहां लोगों पर कोई खास असर नहीं हुआ।
बिहार में कम वोटिंग प्रतिशत की एक और वजह यह भी हो सकती है कि जिन इलाकों में गुरुवार को वोट डाले गए, वे नक्सल प्रभावित हैं। बिहार में औरंगाबाद, गया, नवादा और जमुई लोकसभा सीटों के लिए वोट डाले गए, जिसके कई हिस्से नक्सल प्रभावित हैं। नवादा विधानसभा सीट के लिए भी गुरुवार को मतदान हुआ, जहां उपचुनाव कराया गया है। यहां आरजेडी विधायक राजबल्लभ यादव को एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म के लिए दोषी ठहराए जाने के कारण उपचुनाव कराया गया है।
बहरहाल, बिहार में मतदाताओं की राजनीतिक पसंद-नापसंद का खुलासा तो 23 मई की मतगणना के बाद ही होगा, फिलहाल पहले चरण के तहत यहां जिन दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है, उनमें केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवास के बेटे चिराग पासवान भी हैं, जो जमुई से एलजेपी के उम्मीदवार हैं।