लोकसभा चुनाव के तहत पहले चरण के लिए जारी मतदान में हर उम्र के मतदाता हिस्सा ले रहे हैं। मतदान केंद्रों पर कतार में अपनी बारी की प्रतीक्षा करते बुजुर्ग मतदाता जहां युवाओं को भी लोकतंत्र के इस महापर्व में भागीदारी के लिए प्रेरित कर रहे हैं, वहीं ऐसे मतदाता भी नजर आए, जो अपने रोजमर्रे के जीवन में कई तरह की शारीरिक चुनौतियों का सामना करने के बावजूद मतदान केंद्रों तक पहुंचे।
ऐसे ही वोटर्स में उत्तराखंड की दिव्या बिसारिया (35) हैं, जो पोलिया से ग्रस्त होने और चलने-फिरने में आने वाली दिक्कतों के बावजूद अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए मतदान केंद्र तक जाने और अपना वोट डालने से नहीं चूकीं। कुदरत के क्रूर प्रहार ने उनकी जिंदगी को चुनौतीपूर्ण बना दिया है, लेकिन इन चुनौतियों ने मतदान को लेकर उनका हौसला पस्त नहीं होने दिया।
दिव्यांग दिव्या को देखकर यह यकीन करना मुश्किल होता है कि उनकी उम्र 35 साल की होगी। कुदरत के कहर के बावजूद उनका हौसला और जज्बा किसी मिसाल से कम नहीं है। उन्होंने उत्तराखंड के बाजपुर में गुरुवार को अपना वोट डाला। यह पूछे जाने पर कि पोलिया से ग्रस्त होने के कारण उन्हें निश्चित तौर पर यहां आने में तकलीफ हुई होगी, फिर भी उन्होंने वोट करना क्यों जरूरी समझा, दिव्या ने कहा, ‘देश की नागरिक होने के नाते वोट देना मेरा कर्तव्य है। मैं देश के भविष्य के लिए अपना वोट डालने आई हूं।’
उन्होंने देश के अन्य दिव्यांगों से भी अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने के लिए और लोकतंत्र के इस महात्यौहार में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने मतदान केंद्रों पर दिव्यांग वोटर्स के लिए व्हील चेयर और अन्य सुविधाओं को लेकर भी संतोष जताया।
दिव्या ने न केवल एक जिम्मेदार मतदाता के तौर पर अपनी जिम्मेदारी को बखूबी समझा, बल्कि वह अपने रोजमर्रा के जीवन को भी उसी हौसले के साथ जीती हैं। दिव्यांग होने के बावजूद उनके हौसले बुलंद हैं और वह जीवन में कुछ कर गुजरने की इच्छा रखती हैं। फिलहाल वह बी कॉम और एम कॉम के छात्रों को ट्यूशन पढ़ाती हैं। उनके पिता सुगर मिल में काम किया करते थे, जो अब रिटायर हो गए हैं।

