भारत ने 2016 में उड़ी सैन्य शिविर पर आतंकी हमले के बाद नियंत्रण रेखा के पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी और आतंकियों के कई लॉन्च पैड्स ध्वस्त कर दिए थे। भारतीय राजनीति में इसकी खूब चर्चा रही। बीजेपी पर यह आरोप लगता रहा है कि उसने हमेशा इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया और चुनावों में फायदा लेने की कोशिश की। बीते दिनों पुलवामा आतंकी हमले के बाद भी भारत ने एयर स्ट्राइक की थी, जो 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक से कई मायनों में आगे थी।
भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक जहां नियंत्रण रेखा से सटे इलाकों में ही की थी, वहीं एयर स्ट्राइक पाकिस्तान के बालाकोट में की गई थी, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद के कई प्रशिक्षण केंद्र ध्वस्त कर दिए गए। पाकिस्तान स्थित इसी संगठन ने पुलवामा हमले की जिम्मेदारी ली थी। यह 1971 के बाद पहला मौका था, जब भारतीय वायुसेना सरहद लांघ पाकिस्तान गई थी। बीजेपी पर बार-बार एयर स्ट्राइक का जिक्र कर भी चुनाव में फायदा लेने का आरोप लगा तो सेना के राजनीतिकरण की बात भी कही गई। इन सबके बीच भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डी एस हुड्डा ने कहा है कि मोदी सरकार ने निश्चित तौर पर इस मामले में बड़ा संकल्प दिखाया, लेकिन सेना के हाथ पहले भी कभी बंधे नहीं थे।
साल 2016 में की गई सर्जिकल स्ट्राइक की अगुवाई कर चुके लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) हुड्डा बेहद मायने रखता है, क्योंकि पिछली कई जनसभाओं में पीएम नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी के कई नेता एक न्यूज रिपोर्ट का हवाला देकर यह कहते रहे हैं कि 2008 के मुंबई आतंकी हमले के बाद ही सेना पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए तैयार थी, पर कांग्रेस की अगुवाई वाली तत्कालीन यूपीए सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी, जबकि बीजेपी की अगुवाई वाली मौजूदा एनडीए सरकार ने सेना को खुली छूट दी है। कांग्रेस पर राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले पर उदासीनता बरतने का आरोप भी लग चुका है। कांग्रेस के खेमे से भी ऐसी आवाजें सुनी गईं कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले पर मोदी सरकार अपेक्षाकृत अधिक सख्त है। संभवत: यही वजह है कि 2019 के आम चुनाव में यह एक बड़ा मुद्दा है।
इन सबके बीच, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) हुड्डा ने शुक्रवार को कहा कि मोदी सरकार ने सेना को सीमा पार जाकर स्ट्राइक की अनुमति देने में बड़ा संकल्प दिखाया है, लेकिन सेना के हाथ इससे पहले भी कभी बंधे नहीं थे। वह विज्ञापन संगठनों की ओर से आयोजित ‘गोवा फेस्ट’ में बोल रहे थे। ‘सेना को खुली छूट’ देने के संबंध में उन्होंने कहा कि इस पर बहुत बातें हुई हैं, लेकिन सेना 1947 में देश की आजादी के बाद से ही स्वतंत्र है और नियंत्रण रेखा सहित अंतराष्ट्रीय सीमा पर भी कई मायनों में उन्हें खुली छूट होती है।
उन्होंने कहा कि देश की आजादी के बाद भारतीय सेना तीन-चार युद्ध लड़ चुकी है और कई मौके पर सैन्यकर्मी स्वतंत्र निर्णय लेते हैं। नियंत्रण रेखा के हालात का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह खतरनाक जगह है। कई बार ऐसा होता है, जब ऊपर से गोलीबारी की जा रही होती है। ऐसे में जमीन पर तैनात सैनिक तुरंत इसका जवाब देंगे। वे पूछेंगे नहीं। इसमें अनुमति लेने का कोई सवाल ही नहीं है। उन्होंने कहा, ‘सेना को खुली छूट दी गई है…. कोई विकल्प नहीं है।’
सितंबर 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान नॉर्दर्न कमान का नेतृत्व संभाल चुके लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) हुड्डा इससे पहले भी कह चुके हैं कि इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया, इसकी जरूरत नहीं थी। बीते दिसंबर में एक चर्चा के दौरान उन्होंने ‘सेना के राजनीतिकरण’ को लेकर आगाह किया तो यह भी कहा कि उड़ी हमले के बाद पाकिस्तान को कड़ा संदेश देना जरूरी हो गया था। इस पर खुशी स्वाभाविक है, लेकिन इसका लगातार प्रचार-प्रसार ठीक नहीं है।
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) हुड्डा के नेतृत्व में राष्ट्रीय सुरक्षा पर एक टास्क फोर्स का गठन पिछले दिनों किया था। उन्हें देश के लिए एक विजन पेपर तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उन्होंने हाल ही में अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपी। इस बीच उनके कांग्रेस से जुड़ने की अटकलों ने भी जोर पकड़ा, जिसे उन्होंने सिरे से खारिज किया।