दिल्ली सरकार ने बृहस्पतिवार को स्पष्ट किया कि कुछ निजी स्कूलों द्वारा ‘अनुचित फीस बढ़ोत्तरी’ शिक्षकों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से संबंधित नहीं थी।उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि कुछ निहित स्वार्थों की वजह से ‘गलत धारणा’ बनाने का प्रयास किया जा रहा है कि आप सरकार आयोग की सिफारिश लागू करने के खिलाफ है, जोकि ‘पूरी तरह से आधारहीन’ है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को आप सरकार की याचिका पर राष्ट्रीय राजधानी के निजी गैरवित्तपोषित स्कूलों द्वारा फीस में अंतरिम बढोतरी पर आठ अप्रैल तक रोक लगा दी थी।
सिसोदिया ने कहा, ‘कुछ निजी स्कूलों द्वारा अनुचित फीस बढोतरी का निजी स्कूलों में काम कर रहे शिक्षकों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने से कोई लेना-देना नहीं है।’
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार शहर में शिक्षा में निजी स्कूलों की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करती है। उन्होंने कहा कि सरकार निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों से फीस के नाम पर ‘जबरन वसूली’ किये जाने के खिलाफ है।
गौतरब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को आप सरकार की याचिका पर राष्ट्रीय राजधानी के निजी गैरवित्तपोषित स्कूलों द्वारा शुल्क में अंतरिम बढोत्तरी पर आठ अप्रैल तक रोक लगा दी थी। आप सरकार ने अपनी याचिका में इन स्कूलों की अंतरिम शुल्क बढोत्तरी को अनुमति देने के एकल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति आई एस मेहता की पीठ ने नोटिस जारी करके ‘एक्शन कमेटी अनएडिड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स’ से जवाब मांगा। बड़ी संख्या में निजी स्कूल इस संगठन के सदस्य हैं।
दिल्ली सरकार ने मंगलवार को उच्च न्यायालय में उसके एकल न्यायाधीश की पीठ के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें राष्ट्रीय राजधानी के निजी गैरवित्तपोषित स्कूलों को शिक्षकों तथा अन्य कर्मचारियों के वेतन पर सातवें केन्द्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए शुल्क में अंतरिम बढोत्तरी करने की अनुमति दी थी।
(एजेंसी इनपुट के साथ)