1946 में वी सांथानाम 27 साल के युवा भारतीय नागरिक थे जो बंबई में अपने चार दोस्तों के साथ किराए के मकान में रहते थे। पिछले साल उन्होंने भारतीय प्रांतीय चुनाव में वोट दिया था और वर्तमान में 101 वर्ष के हो चुके इस व्यक्ति ने हार नहीं मानी और लोकसभा चुनाव 2019 में भी इन्होंने पोलिंग बूथ जाकर मतदान किया और अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
11 अप्रैल को नोएडा में हुए पहले चरण के मतदान में उन्होंने वोट किया और उन्हें उम्मीद है कि वे जब तक जिंदा रहेंगे आगे भी अपना वोट देंगे। ये एक ऐसे भारतीय नागरिक हैं जिन्होंने कभी भी वोटिंग ना करने का बहाना नहीं बनाया किसी भी सूरत में इन्होंने हमेशा अपने मताधिकार का प्रयोग किया है।
उनका मानना है कि ये हमारा अधिकार है कि हमारे देश को चलाने वाले नेता का हम चुनाव करें। आखिरकार जनता ही सरकार है ना कि सरकार से जनता है। उन्हें संस्कृत श्लोक पढ़ना बेहद पसंद है साथ ही वे कार्ड्स भी खेलते हैं।
उनका पोता आर राजागोपालन ने कहा कि जब मेरी बेटी उनसे पूछती है कि वे कभी भी वोटिंग करना मिस कैसे नहीं करते हैं इस पर उनका एक ही जवाब होता है कि गुलामी का अनुभव करने के बाद स्वतंत्रता का अनुभव बेहद खास होता है इसके बाद बोलने की आजादी और वोट करने की आजादी औऱ इसकी शक्ति का एहसास होता है।
73 साल की उम्र से वे वोट करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि वे चुनाव प्रचार में और राजनीति में पैसों के अंधाधुंध खर्च जैसे बदलाव देखते हैं। पहले रैली क्या होता था कैसे होता था ये किसी को पता भी नहीं होता था।
आजादी शुरुआती दिनों में मैं बंबई गया हुआ था उस दौरान सरदार बल्लभभाई पटेल ने अपनी चुनावी संबोधन में अपनी पार्टी को वोट देने के लिए जनता से अपील की थी। उस जमाने में राजनीति और पैसों का कोई मेलजोल नहीं था लेकिन आज राजनीति और पैसा आपस में एक दूसरे के पूरक बन गए हैं। आज किसी की भी जीत होती है वह चुनाव प्रचार के लिए पूरे पैसे झोंक देता है।