मां की ममता का मोल नहीं, बच्ची को बचाने के लिए दी किडनी

जब कोई भी नवजात मां के कोख से बाहर आता है या कहें कि अपनी नन्ही आँखों से पहली बार इस दुनिया को देखता है तो सबसे पहले उसके मुख से निकलने वाला शब्द माँ होता है। मां का भाव अपने संतान के लिए कितना करुणा भरा होता है इसको शब्दों में बयां करना किसी के लिए भी आसान नहीं है। ऐसे में माँ की ममता और अपनत्व की कहानी तो आपने खूब पढ़ी और सुनी होगीं। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे माँ की कहानी बताएंगे जिसको पढ़कर शायद अपना मन पसीज जाएगा।

महाराष्ट्र के पुणे शहर में एक मां ने अपने बच्ची के लिए किडनी दे दी। बच्ची स्पाइना बिफिडा जैसी गंभीर बीमारी से ग्रसित थी। जिसके कारण उसकी किडनी पूरी तरह से खराब हो गयी थी। परिवार के मुताबिक उन्होंने बच्ची को पंद्रह वर्ष पहले एक गैर सरकारी संगठन (NGO) से गोद लिया था और उनको बीमारी के बारे में उसी समय से जानकारी थी।

स्पाइना बिफिडा नवजात शिशु की रीढ़ की हड्डी से जुड़ी एक जन्मजात बीमारी है। इसके कारण शिशु को ज्यादातर कमर के आसपास फोड़ा होता है। कुछ मामलों में यह बच्चों के सिर या गर्दन पर दिखाई देता है। डॉक्टरों के मुताबिक इसकी मुख्य वजह गर्भावस्था के दौरान महिलाओं द्रारा विटामिन का सेवन देरी से करना है। भारत में इस बीमारी ने विकराल रूप ले लिया है। दुनिया भर में सबसे अधिक मरीज इसके भारत में हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बच्ची का नाम सारा है और वह बीते दो वर्षों से डायलिसिस पर है। डॉक्टरों ने उसको किडनी बदलवाने की सलाह दी थी। बच्ची के परिवार में माता-पिता के साथ छ: भाई भी हैं और सभी सारा को किडनी दान करने के लिए तैयार थे। रिपोर्टस् के मुताबिक सारा की किडनी सिर्फ उसके माँ के साथ मैच हुई। यह पूरी प्रकिया पुणे के जहांगीर अस्पताल में 20 फरवरी को हुई।

बच्ची के पिता ने एचटी को बताया कि सारा के शरीर में फोलिक एसिड का कमी की वजह से उसके स्पाइनल कॉलम में गैप था जिसने बाद में ट्यूमर की शक्ल ले ली। इस कारण यूरिन पास होने में दिक्कत हो रही थी। उनके मुताबिक बच्ची बैलडर पर से नियंत्रण खो चुकी थी और उसमें बहुत अवरूद्ध हो रहा था।

रिपोर्ट के मुताबिक बच्ची को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के लिए परिवार ने बेगलुरू से गोवा जाने का फैसला किया। डॉक्टर वृंदा पुष्कर ( ट्रांसप्लांट संयोजक) के मुताबिक बच्ची के प्रति परिवार का प्यार प्रसंसनीय था। छ: बेटे होते हुए भी एक बच्ची को पाने की लालसा माता-पिता की देखते बनती है।

हालांकि पूरी प्रकिया सफल रही और माँ-बच्ची पूरी तरह स्वस्थ हैं। हॉस्पिटल में 8 दिन रहने के बाद माँ और बच्ची दोनों को डिस्जार्ज कर दिया गया।