राजापुर एवं रायपुर ग्रामवासियों के सफल प्रयास से सकुशल संपन्न हुआ मूर्ति विसर्जन

बहराइच जिले के थाना खैरीघाट क्षेत्र के अंतर्गत मूर्ति विसर्जन बड़े ही शन्ति एवं बिना वाद विवाद के सकुशल विसर्जन संपन्न हुआ जिसमे इंस्पेक्टर खैरीघाट पंकज कुमार सिंह सहित थाने की अन्य पुलिस का तथा महिला पुलिस का भी अहम योगदान रहा।

जैसा की हम सभी जानते हैं की हम सभी की वैश्विक महामारी से पिछ्ले कई महीनों से जंग जारी है। covid-19 से जंग अभी भी जारी है ऐसे समय मे सामूहिक रूप से इकट्ठा होना खतरों से खाली नही हैं। इन्ही बातों को ध्यान मे रखते हुए राजापुर के ग्रामवासी निर्मल वर्मा, अशाराम वर्मा, शोभाराम वर्मा जीवनलाल एवं कई अन्य लोग तथा रायपुर ग्रामवासी पुरषोत्तम लाल पाठक, राकेश सिंह,मोनू पाठक तथा अन्य ग्रामवासीयों के अथक प्रयास से शान्तिपूर्वक पुलिस की निगरानी मे मूर्ति विसर्जन किया गया।

 

दुर्गा मूर्ति विसर्जन का महत्व:

समस्त संसार को पंचतत्वों से बना हुआ माना जाता है. शास्त्रों में कहा भी गया है- क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा पञ्च तत्व ये अधम शरीरा. यानि कि शरीर आकाश, जल, अग्नि और वायु से मिलकर बना है. जल भी पंचतत्व है इसे काफी पवित्र माना गया है क्योंकि यह हर गुण दोष को अपने आप में विलेन कर लेता है. पूजा में भी पवित्र जल से पवित्रीकरण किया जाता है.

हिंदू पुराणों में जल को ब्रह्म माना गया है. यह भी गया गया है कि सृष्टि की शुरुआत से पहले और इसके अंत के बाद संपूर्ण सृष्टि में सिर्फ जल ही जल होगा. जल आरंभ, मध्य और अंत बताया गया है. यह चिर तत्व है. इसी वजह से जल में त्रिदेवों का वास भी माना जाता है. यही वजह है कि पूजा पाठ में भी पवित्रीकरण के लिए जल का प्रयोग किया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जल में देव प्रतिमाओं को विसर्जित करने के पीछे यह कारण है कि देवी देवताओं की मूर्ति भले ही विलीन हो जाए लेकिन उनके प्राण मूर्ति से निकलकर सीधे परम ब्रह्म में लीन हो जाते हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं.