कोरोनाकाल में अमेरिका में भड़की हिंसा, ट्रंप ने Antifa को बताया जिम्मेदार 

कोरोनाकाल में अमेरिका में भड़की हिंसा, ट्रंप ने Antifa को बताया जिम्मेदार
कोरोनाकाल में अमेरिका में भड़की हिंसा, ट्रंप ने Antifa को बताया जिम्मेदार

नई दिल्ली। कोरोना कहर के बीच अफ्रीकी मूल के अमरीकी नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस के हाथों मौत के बाद अमेरिका में विरोध प्रदर्शन और हिंसा की आग भड़क उठी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर हिंसा जारी रही तो वो सेना तैनात करेंगे। इतना ही नहीं, कुछ पहले ट्रंप ने ये भी कहा था कि हमारे पास बेहतरीन हथियार और खतरनाक कुत्ते हैं।

फिलहाल एक हफ्ता बीत चुका है लेकिन, ज्यादातर राज्य अब तक हिंसा, आगजनी और लूटपाट पर पूरी तरह काबू नहीं पा सके हैं। जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद अश्वेतों का प्रदर्शन उग्र होता जा रहा है। अमेरिका के 40 शहर हिंसा की आग में झुलस रहे हैं। इसकी आंच रविवार को वाइट हाउस तक पहुंच गई। वाइट हाउस के पास मामला इतना बिगड़ गया कि सीक्रेट सर्विस एजेंट्स राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वाइट हाउस में बने सुरक्षात्मक बंकर में लेकर चले गए। वहीं, वाशिंगटन में रात को कर्फ्यू का ऐलान करना पड़ा। राजधानी में पुलिस की सहायता के लिए मेयर ने नेशनल गार्ड्स के तैनाती की मंजूरी दे दी है। ट्रंप ने हिंसा के पीछे वामपंथी संगठनों को जिम्मेदार ठहराया है जिन्हें आमतौर पर एंटीफा  कहा जाता है।

डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया है कि  जॉर्ज फ्लॉयड के लिए शुरू हुए आंदोलन को हाइजैक कर लिया गया है और अब उन्होंने ऐसे लोगों को आतंकवादी घोषित करने का फैसला किया है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका एंटीफा  को आतंकवादी संगठन करार देगा।

आखिर एंटीफा है क्या और ट्रंप इसे क्यों अमेरिका के सुलगने का जिम्‍मेदार बता रहे हैं ?

दरअसल, अमेरिका में फांसीवाद विरोधी लोगों को एंट‍िफा यान‍ी एंट‍ी-फास‍िस्‍ट कहा जाता है। अमेरिका में एंट‍िफा आंदोलन उग्रवादी, वामपंथी और  फांसीवादी विरोधी आंदोलन के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ये लोग नव-नाजी, नव-फांसीवाद, श्वेत सुपीरियॉरिटी और रंगभेद के खिलाफ होते हैं और सरकार के विरोध में खड़े रहते हैं। इस आंदोलन से जुड़े लोग आमतौर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं, रैलियां करते हैं। लेक‍िन मौका आने पर हिंसा करने से भी नहीं चुकते हैं।

एंटीफा के गठन को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है। इससे जुड़े सदस्य दावा करते हैं कि इसका गठन 1920 और 1930 के दशक में यूरोपीय फासीवादियों का सामना करने के लिए किया गया था। हालांकि एंटीफा की गतिविधियों पर नजर रखने वाले जानकार बताते हैं कि एंटीफा आंदोलन 1980 के दशक में एंटी-रेसिस्ट एक्शन नामक एक समूह के साथ शुरू हुआ था। 2000 तक यह आंदोलन एकदम सुस्त था लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता संभालने के बाद इसने रफ्तार पकड़ी है।

अमेरिका में एंटीफा के सदस्यों की पहचान करना मुश्किल है, क्योंकि इनमें से ज़्यादातर लोग पुलिस कार्रवाई के कारण सार्वजनिक खुलासा नहीं करते हैं। इनका कोई आधिकारिक नेता भी नहीं है। कहीं भी जब कोई रंगभेद से संबंधित विरोध प्रदर्शन का मामला आता है तो इसके सदस्य चुपचाप उस स्थान पर आंदोलन करने पहुंच जाते हैं। ये लोग अधिकतर काले कपड़े पहने होते हैं। प्रदर्शन के दौरान एंटीफा के सदस्य हिंसात्मक गतिविधियों में भी शामिल होते हैं। इसके सदस्य दक्षिणपंथी नेताओं और विचारधारा का भी खुलकर विरोध करते हैं। दक्षिणपंथी कार्यकर्ता या नेताओं को रोकने के लिए चिल्लाना, भगदड़ मचाना और मानव श्रृंखला बनाना इनकी पसंदीदा रणनीति है। जब ये रणनीतिया कामयाब नहीं होता है तब यह हिंसा और आगजनी का सहारा लेते हैं।

राष्ट्रपति ट्रंप ने हिंसा के लिए वामपंथी कट्टरपंथियों को ज़िम्मेदार ठहराया है। वहीं आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप समाज में विभाजन पैदा कर रहे हैं।