गर्भवती महिला की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में गर्भ को बता दिया सिस्ट,शिशु की मौत

कर्नलगंज क्षेत्र के निजी अस्पताल एवं डायग्नोस्टिक सेंटर की घोर लापरवाही लगे आरोपों का है

मामला# कर्नलगंज/गोंडा।। तहसील मुख्यालय के कस्बा कर्नलगंज क्षेत्र में एक अस्पताल संचालक द्वारा लिखे गए जांच कराने के पर्चे पर डायग्नोस्टिक सेंटर द्वारा 4 माह की गर्भवती के जांच रिपोर्ट में गर्भ को सिस्ट बताने के बाद डॉक्टरों द्वारा दवा देने से गर्भवती की हालत बिगड़ने और गर्भस्थ शिशु की मौत का लापरवाही पूर्ण गंभीर हैरतअंगेज मामला सामने आया है जिसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की गई है जो चर्चा का विषय होने के साथ समूचे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला तहसील मुख्यालय के क्षेत्र कर्नलगंज का है जहां कोतवाली कर्नलगंज अन्तर्गत ग्राम चतरौली निवासिनी रीता सिंह का कहना है कि वह बीते फरवरी माह से गर्भवती थी,6 मई को उसके पेट में दर्द होने लगा जिस पर परिवार वालों के साथ वह कस्बा कर्नलगंज स्थित श्री भगवान हास्पिटल एंड ट्रामा सेंटर पहुंची वहां मौजूद डाक्टर रवि वैश्य ने 10 हजार रुपए जमा कराकर दवा दे दिया परन्तु रसीद नहीं दी,फायदा ना होने पर वह दूसरे दिन भी उनके अस्पताल पहुंची तो‌ वहां डाक्टर पायल वैश्य मिलीं। उन्होंने सुपरियर डायग्नोस्टिक सेंटर पर भेज दिया जहां अल्ट्रासाउंड कराने के बाद मिली जांच रिपोर्ट में पेट में सिस्ट होने की गलत रिपोर्ट बना दी गई। जिसे लेकर हॉस्पिटल पहुंची और डाक्टर से बार-बार अपने को गर्भवती होने की जानकारी दी मगर उसकी एक नहीं सुनी गई दवा देकर उसे पुनः वापस कर दिया गया। आरोप है कि 3 जून को उसे पीड़ा होने लगी जिससे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाते समय रास्ते में ही अधिक रक्त स्त्राव होने के साथ ही मृत शिशु पैदा हुआ जिस पर अस्पताल में स्टाफ नर्स को दिखाने के बाद मृत शिशु के‌ शव को केमिकल युक्त बाक्स में रखकर प्रसव कक्ष में जमा करवा दिया। महिला ने इलाज करने वाले चिकित्सकों व गलत अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट बनाने वाले डायग्नोस्टिक सेंटर के लोगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। @ आरोपी चिकित्सक व डायग्नोस्टिक सेंटर के ज़िम्मेदार लोगों की दलील –श्री भगवान हॉस्पिटल के संचालक डॉ रवि वैश्य का कहना है कि अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के आधार पर महिला का दवा इलाज किया गया है। वहीं सुपीरियर डायग्नोस्टिक सेंटर पर अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट तैयार करने वाले डाक्टर यस सिंह़। का कहना है कि उपकरण मशीन द्वारा रिपोर्ट महिला को दी गई थी। @ क्या कहते हैं जिम्मेदार स्वास्थ विभाग के अधिकारी— सामुदायिक स्वास्थ केंद्र अधीक्षक डॉक्टर सुरेश चंद्रा का कहना है कि प्रकरण के संबंध में जानकारी मिली है उच्चाधिकारियों द्वारा भी जांच का निर्देश दिया गया है, उनके निर्देशानुसार मामले की जांच के लिए जांच कमेटी गठित कर दी गई है। जिसकी जांच रिपोर्ट आने के पश्चात जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी। ऐसे में अब गंभीर सवाल यह उठता है कि यदि संबंधित चिकित्सक और डायग्नोस्टिक सेंटर के जिम्मेदार कर्मी वास्तव में प्रशिक्षित एवं योग्य डिग्री धारक हैं और जिम्मेदारी के साथ कार्य कर रहे हैं तो इतनी बड़ी गंभीर जीवन के साथ खिलाफ जैसा लापरवाही जनक अवैधानिक कृत्य कैसे हो सकता है ? जबकि क्षेत्र के डायग्नोस्टिक सेंटर एवं चिकित्सकों का नया कारनामा नहीं है। उक्त मामले ने संबंधित लोगों की घोर निरंकुश कार्यप्रणाली को उजागर तो किया ही है वहीं समय समय पर चिकित्सालयों डायग्नोस्टिक सेंटरों की जांच करने हेतु अधिकृत स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली और समूचे सरकारी तंत्र को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।