भारत ने बीते सप्ताह अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ी सामरिक कामयाबी हासिल की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (27 मार्च) को ‘मिशन शक्ति’ की सफलता का ऐलान किया था, जिसके बाद भारत यह क्षमता हासिल करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया। इससे पहले यह क्षमता सिर्फ दुनिया के तीन देशों रूस, अमेरिका और चीन के पास थी।
भारत की इस सफलता के बाद इन देशों ने जहां सधी हुई प्रतिक्रिया व्यक्त की, वहीं अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का कहना है कि इससे अंतरिक्ष में करीब 400 टुकड़ों का मलबा फैल गया है और यह अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खतरनाक हो सकता है। नासा का कहना है कि अंतरिक्ष में एक-एक मलबे को गिन पाना मुश्किल है, पर छोटे-बड़े तकरीबन 400 टुकड़ों का मलबा भारत के इस परीक्षण के बाद अंतरिक्ष में फैल गया है।
अंतरिक्ष एजेंसी का यह भी कहना है कि उसकी नजर फिलहाल अंतरिक्ष में करीब 10 सेंटीमीटर तक के बड़े टुकड़ों पर है और फिलहाल अंतरिक्ष में ऐसे मलबों के करीब 23,000 टुकड़े हैं। नासा के अनुसार, इनमें 2007 में चीन द्वारा एंटी-सैटलाइट मिसाइल के परीक्षण के बाद मलबे का करीब 3,000 टुकड़ा अंतरिक्ष में फैल गया था। नासा प्रमुख जिम ब्राइडेंसटाइन का यह भी कहना है कि भारत द्वारा एंटी सैटेलाइट मिसाइल के परीक्षण के बाद अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के साथ इन टुकड़ों के टकराव का खतरा 44 प्रतिशत तक बढ़ गया है।