पुलवामा में आतंकी हमले के करीब पांच दिन बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान बयान दे रहे थे। उनके बयानों पर अगर गौर करें तो उसमें निंदा कम थी बल्कि धमकी ज्यादा थी। 14 फरवरी को सीआरपीएफ काफिले पर आतंकी हमले के तुरंत बाद जैश-ए-मोहम्मद ने जिम्मेदारी ली लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को सबूतों की जरूरत है। इसके साथ ही वहां के रेल मंत्री भड़काऊ बयान के जरिए भारत को नसीहतें देते नजर आए तो पाकिस्तान का दूसरा रूप भी सामने आया।
ये वो लोग हैं जिनका पाकिस्तान की सियासत से लेना देना नहीं है। वह आम पाकिस्तानी हैं जिन्हें उम्मीद है कि भारत के साथ शांति और सद्भाव के जरिए वह अपने भविष्य को संवार सकते हैं। पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर एंटी हेट चैलेंज, बी स्टैंड विद इंडिया, नो टू वॉर, कंडेम पुलवामा अटैक हैशटैग के जरिए लोग अपनी भावना का इजहार कर रहे हैं।

हाथों में तख्ती लिए हुए अलग-अलग चेहरे हम लोगों के सामने हैं और संदेश साफ है कि वह पुलवामा आतंकी हमले की निंदा कर रहे हैं। ये बात अलग है कि पाकिस्तान के हुक्मरान वही बयान दे रहे हैं जो मुंबई हमलों, पठानकोट अटैक के बाद देते थे। कश्मीर घाटी में हर आतंकी हमले के पीछे उन्हें भारत की साजिश नजर आती है लेकिन वह भूल जाते हैं कि सभी हमलों में उन संगठनों ने जिम्मेदारी ली है जो पाकिस्तान की धरती से संचालित होते हैं।
पाकिस्तान की वह आबादी मशहूर शायर साहिर लुधियानवी का जिक्र करते हुए कहती है कि युद्ध अपने आप में एक समस्या है। समस्याओं का सामना भला युद्ध से कैसे हो सकता है। आज आग और खून की बारिश होगी तो कल भुखमरी का सामना करेंगे। ये वह सोच है जो पाकिस्तान की युवा आबादी के दिल और दिमाग में जगह बना रही है लेकिन पाकिस्तान हुकुमरानों ने अपने कानों को बंद कर रखा है। उन्हें सिर्फ वही कुछ सुनाई देता है जिसमें सियासी नफा छिपा हो।
गौरतलब है कि बीते गुरुवार यानी 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर जैश-ए-मोहम्मद की ओर से फिदायिन हमला किया गया था। इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले के बाद से देश भर के लोगों में कड़ा गुस्सा देखने को मिल रहा है और हर कोई पाकिस्तान और आतंकवादियों से जवानों की शहादत का बदला चाहता है।