आज इसरो नए कीर्तिमान गढ़ रहा, चाहे चंद्रयान 3 हो, मंगलयान हो या फिर सबसे सस्ते उपग्रह लांच करना हो। इसरो ने पुरे विश्व को बता दिया की अब हम भी अंतरिक्ष की रेस में फर्रांटा भर रहे है। पर अगर हम कहें की पड़ोसी देश पाकिस्तान ने हमसे पहले ही रॉकेट लांच करने में कामयावी हासिल कर ली थी तो शायद आपको भी यकीन नहीं होगा पर ये बिलकुल सच है।
पाकिस्तान की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी, अंतरिक्ष और ऊपरी वायुमंडल अनुसंधान आयोग (SUPARCO) की स्थापना 1961 में कराची में की गई थी, औपचारिक रूप से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के करीब आठ साल पहले।
जून 1962 में, पाकिस्तान एशिया में जापान और इज़राइल के बाद तीसरा देश बन गया, जिसने नासा और अमेरिकी वायु सेना के साथ सहयोगी भागीदार के रूप में रॉकेट, Rehbar-1 लॉन्च किया। सुपार्को के शुरुआती वर्षों ने पाकिस्तान को बहुत सारे सपने दिखाए। चार शीर्ष वैज्ञानिकों को नासा में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का अध्ययन करने के लिए भी भेजा गया था। SUPARCO के संस्थापक-निदेशक वैज्ञानिक Abdus Salam, 1979 में नोबेल पुरस्कार (भौतिकी) जीतने वाले पहले और अब तक के एकमात्र पाकिस्तानी बने।
आखिर क्यों पिछड़ी SUPARCO
उपमहाद्वीप की सबसे पुरानी अंतरिक्ष अन्वेषण एजेंसी सुपार्को कई कारकों के कारण इसरो से पिछड़ गई है। इनमें अंतरिक्ष अन्वेषण के प्रति Pakistan सरकार की उदासीनता, खराब फंडिंग और सबसे ऊपर, वैज्ञानिक निकाय का व्यापक सैन्य नेतृत्व शामिल है। जबकि इसरो का नेतृत्व वैज्ञानिकों द्वारा किया गया है, पिछले कुछ समय से ज्यादातर SUPARCO के अध्यक्ष के मेजर जनरल रहे हैं।
1970 के दशक में भारत ने अपना पहला उपग्रह प्रक्षेपण आर्यभट्ट-1 लॉन्च किया। पाकिस्तान ने 1990 में चीनी सहायता से अपना पहला उपग्रह बद्र-1 लॉन्च किया। पाकिस्तान के अंतरिक्ष अन्वेषण में असली गिरावट 1980 के दशक के अंत से शुरू हुई जब राष्ट्रपति जिया-उल-हक (Muhammad Zia-ul-Haq) ने प्रमुख परियोजनाओं के लिए फंड देना ही बंद कर दिया। पाकिस्तान ने अपना धन और संसाधन पूरी तरीके से परमाणु बम बनाने पर केंद्रित कर दिया था। कुछ ही समय बात सैन्य जनरलों ने वैज्ञानिकों को SUPARCO प्रमुख के रूप में प्रतिस्थापित कर दिया। हालात तब और भी बदतर हो गए जब पाकिस्तान द्वारा मुसलमानों में अल्पसंख्यक अहमदिया होने के कारण डॉ. सलाम को अस्वीकार कर दिया गया।
ISRO का उत्थान और नए आयाम
ISRO का विकास निरंतर जारी रहा। आज इसरो को न केवल अंतरिक्ष-आधारित संचालन (space-based operations), अंतरिक्ष अन्वेषण (Space exploration), अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष सहयोग (international space cooperation) और संबंधित प्रौद्योगिकियों के विकास का काम सौंपा गया है, बल्कि यह दुनिया की छह सरकारी अंतरिक्ष एजेंसियों में से एक है, जिनके पास पूर्ण प्रक्षेपण क्षमताएं हैं और वे कृत्रिम अंतरिक्षयानों का एक बड़ा बेड़ा संचालित करते हैं।
भारत में 1962 में जवाहरलाल नेहरू (Jawaharlal Nehru) के अधीन भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (INCOSPAR) की स्थापना की गई थी। INCOSPAR 1969 में परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) के तहत इसरो बन गया।
समय-समय पर SUPARCO को कई झटके लगते ही रहे। समयानुसार प्रक्षेपण में विफलता के कारण एजेंसी को कक्षीय स्लॉट (orbital slot) छोड़ना पड़ा। एजेंसी का दूसरा उपग्रह 2011 में लॉन्च किया गया था।
फरवरी 2017 में ISRO ने 104 उपग्रह अंतरिक्ष में भेजकर न्य विश्व रिकॉर्ड बनाया था, जबकि SUPARCO, फिलहाल, स्वदेशी उपग्रह निर्माण और लॉन्चिंग क्षमताओं को हासिल करने के लिए मिशन 2040 की दिशा में काम कर रहा है।
23 अगस्त, 2023 को, ISRO के Chandrayaan-3 ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में एक सटीक लैंडिंग की, जिससे भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के करीब पहुंचने वाला पहला देश बन गया। दूसरी ओर SUPARCO मिशन और तकनीकी प्रगति दोनों के मामले में कई दशकों से पीछे चल रहा है।